लाइफस्टाइल
Nitin Sharma | Nov 10, 2025, 10:29 AM IST
1.गुजरात का है गांव

भारत के गांवों के बारे में सोचते ही पहले कीचड़, टूटी सड़कें, वीरानियां वगैरह दिमाग में आती थीं. लेकिन गुजरात का यह गाँव इन सभी धारणाओं को तोड़ता है. आणंद जिले का यह गाँव एक ऐसा गाँव है जिसे लोग "एनआरआई विलेज" भी कहते हैं. यहां सिर्फ़ पैसा ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में रहने वाले लोगों का अपने गाँव से जुड़ाव ही सबसे बड़ी ताकत है.
2.इन देशों में रहते हैं ज्यादातर लोग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धर्मज की कहानी 1895 में शुरू होती है जब दो युवक जोतराम काशीराम पटेल और चतुरभाई पटेल अफ्रीका के लिए निकले. इसके बाद प्रभुदास पटेल मैनचेस्टर पहुंचे और "मैनचेस्टरवाला" कहलाने लगे. धर्मज से आए गोविंदभाई पटेल अदन (आज का यमन) गए जहां उन्होंने तंबाकू का कारोबार शुरू किया. अदन उस समय अरब देशों का एक प्रमुख बंदरगाह था. जहां भारतीय व्यापारी व्यापार के लिए जाते थे. यहीं से धर्मज का नाम अफ्रीका और अरब में भी फैलने लगा. आज अनुमान है कि धर्मज से निकले करीब 1700 परिवार ब्रिटेन में, 800 अमेरिका में, 300 कनाडा में और करीब 150 ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड में बसे हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या में धर्मज लोग अफ्रीका और कई अन्य देशों में भी बसे हैं.
3.गांव के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ है

सबसे खास बात ये है कि ये लोग गाँव को कभी नहीं भूले. 2007 में इस गाँव को संगठित विकास का मॉडल बनाया गया और नतीजे चौंकाने वाले रहे. धर्मज में प्रवेश करते ही सबसे पहले आपको साफ़-सुथरी आरसीसी सड़क दिखाई देगी. जिसके किनारे ब्लॉक लगे हैं. न कूड़े के ढेर, न गंदा पानी, पंचायत रोज़ाना सफाई करवाती है और गाँव वाले खुद सफ़ाई का ध्यान रखते हैं. मनोरंजन के लिए यहां सूरजबा पार्क है जिसमें स्विमिंग पूल, बोटिंग और गार्डन जैसी सुविधाएँ हैं. 50 बीघा ज़मीन सिर्फ़ हरी घास उगाने के लिए पशुपालकों को दी गई है ताकि साल भर चारे की समस्या न हो. यहाँ 1972 से भूमिगत जल निकासी व्यवस्था काम कर रही है जो कई शहरों में भी उपलब्ध नहीं है.
4.गांव के बैंक में जमा हैं 1000 करोड़

मात्र 11,333 की आबादी वाले इस 17 हेक्टेयर के गांव में 11 बैंक शाखाएं हैं. राष्ट्रीयकृत, निजी और सहकारी बैंक, सभी मौजूद हैं. गाँव के बैंकों में 1,000 करोड़ रुपये जमा हैं. यहाँ पहला बैंक 1959 में खुला और 1969 में गाँव को अपना ग्राम सहकारी बैंक भी मिला. इसके अध्यक्ष एच. एम. पटेल थे, जो बाद में भारत के वित्त मंत्री बने.
5.यहां पंचायत बहुत समृद्ध है

गांव की सड़कों पर मर्सिडीज, ऑडी और बीएमडब्ल्यू जैसी गाड़ियाँ दिखाई देती हैं. यहाँ तक कि कब्रिस्तान में दान की पर्चियाँ भी शिलिंग (अफ्रीका की मुद्रा) में लिखी होती हैं क्योंकि अफ्रीका से जुड़ाव आज भी ज़िंदा है. धर्मज की असली ताकत इसका पंचायत मॉडल है. पंचायत के अपने संसाधन हैं. गाँव के लोग, चाहे विदेश में हों या भारत में, पंचायत का सहयोग करते हैं. हर साल 12 जनवरी को धर्मज दिवस मनाया जाता है. तब बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय गाँव लौटकर जश्न मनाते हैं. धर्मज न केवल एक समृद्ध और समृद्ध गांव है, बल्कि यह एक संदेश भी देता है कि जब बात अपने गाँव के विकास की हो, तो विदेश में रहते हुए भी गाँव में आमूल-चूल परिवर्तन लाया जा सकता है. यह दर्शाता है कि वैश्विक सफलता और मातृभूमि के प्रति प्रेम मिलकर एक असाधारण कहानी रच सकते हैं.
6.विदेश में रहने के बाद भी गांव में लाये बदलाव

धर्मज न केवल एक समृद्ध और समृद्ध गांव है, बल्कि यह एक संदेश भी देता है कि जब बात अपने गाँव के विकास की हो, तो विदेश में रहते हुए भी गाँव में आमूल-चूल परिवर्तन लाया जा सकता है. यह दर्शाता है कि वैश्विक सफलता और मातृभूमि के प्रति प्रेम मिलकर एक असाधारण कहानी रच सकते हैं.
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