लाइफस्टाइल
Abhay Sharma | Jul 20, 2025, 07:06 PM IST
1.याददाश्त से जुड़ी बीमारी

अनीत पड्डा ने इस फिल्म में अपनी शानदार एक्टिंग के जरिए न सिर्फ भावनाओं को छुआ है, बल्कि लोगों का ध्यान एक गंभीर बीमारी की ओर भी खींचा है. इसमें दिखाया गया है कि जब इंसान की याददाश्त धीरे-धीरे साथ छोड़ने लगती है, तो वो जिंदगी में कितनी कठिनाइयों से गुजरता है.
2.पांच प्वाइंट में समझिए क्या है ये बीमारी

फिल्म देखने के बाद आपके मन में भी ये सवाल आ रहा होगा कि आखिर अल्जाइमर (Alzhiemer's Disease) बीमारी क्या है और इस बीमारी के होने के पीछे के कारण और लक्षण क्या हैं, तो आइए 5 प्वाइंट में समझतें हैं कि क्या है ये बीमारी..
3.1 - क्या अल्जाइमर की बीमारी?

अल्जाइमर दिमाग की एक ऐसी बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने-समझने और काम करने की क्षमता कमजोर होने लगती है. आमतौर पर ये बीमारी 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को होती है. पर कुछ कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं. ये बीमारी डिमेंशिया का सबसे आम कारण माना जाता है.
4.2 - इस बीमारी में क्या होता है?

क्लीवलैंड क्लीनिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीमारी में मरीज के दिमागी सेल्स धीरे-धीरे मरने लगते हैं और इसकी वजह से दिमाग ठीक से काम नहीं कर पाता है. ये सिर्फ ‘भूलने की बीमारी' नहीं, बल्कि दिमाग की कार्यक्षमता में गिरावट का मामला है. इस स्थिति में मरीज को नये काम सीखने, रोजमर्रा के काम करने में दिक्कत आती है.
5.3 - क्या हैं अल्जाइमर के लक्षण?

इस स्थिति में मरीज में याददाश्त का कमजोर होना, रोज की बातें भूलना, नाम या चेहरे पहचानने दिक्कत, सोचने और फैसले लेने में दिक्कत महसूस होना, भाषा को समझने और बोलचाल में परेशानी होना, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, व्यवहार-स्वभाव में बदलाव और चलने में संतुलन नहीं बना पाने जैसे लक्षण नजर आते हैं.
6.4 - क्यों होती है ये बीमारी?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह बीमारी दिमाग में दो तरह की प्रोटीन अमायलॉइड और टाउ के जमने से हो सकता है, बता दें कि अमायलॉइड प्रोटीन दिमाग के सेल्स में चिपक जाती है और प्लाक्स बना लेती है और टाउ प्रोटीन उलझकर टैंगल्स बना लेते हैं. इस स्थिति में ये दोनों दिमाग की कोशिकाओं के बीच communication को रोकती हैं और सेल्स को धीरे-धीरे खत्म करती हैं.
7.5 - किन लोगों को ज्यादा होता है अल्जाइमर का खतरा?

आमतौर पर 65 साल से ज्यादा उम्र के लोग, दिमागी चोट झेल चुके लोग, धूम्रपान करने वाले, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज मोटापा से जूझ रहे लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जाता है. इसके अलावा दिल की बीमारियों से जूझ रहे लोगों और डाउन सिंड्रोम वाले लोगों में भी इसका खतरा ज्यादा देखने को मिलता है.