लाइफस्टाइल
ऋतु सिंह | Mar 07, 2026, 04:16 PM IST
1.असली ‘स्मार्ट’ किसे कहा जाए?

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई (Artificial Intelligence) के दौर में एक बड़ा सवाल बार-बार उठ रहा है कि जब मशीनें जटिल गणनाएं और कोडिंग सेकंडों में कर सकती हैं, तो असली ‘स्मार्ट’ किसे कहा जाए? तकनीक के बढ़ते प्रभाव ने पारंपरिक बुद्धिमत्ता की को चुनौती देनी शुरू कर दी है लेकिन फिर भी मशीन कम से 5 मामलों में इंसानी बुद्धि का मुकाबला नहीं कर सकती है. (Photo Credit - AI Generated)
2. एआई के युग में बुद्धिमत्ता केवल तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं

हाल ही में चिप निर्माण कंपनी के प्रमुख Jensen Huang ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में इस विषय पर अपनी राय साझा की. उनका मानना है कि एआई के युग में बुद्धिमत्ता केवल तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं है. हुआंग के अनुसार अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति किसी इंसान के व्यवहार को कितना समझता है और जटिल परिस्थितियों में कैसे निर्णय लेता है. ये मशीन नहीं समझ सकती है और ऐसे ही कई और गुण हैं जो मशीनों के लिए अब भी कठिन माने जाते हैं. (Photo Credit - AI Generated)
3.तकनीकी से आगे है इंसान की सोच

हुआंग का कहना है कि लंबे समय तक लोगों ने कोडिंग, गणित या कठिन समस्याओं को हल करने की क्षमता को ही बुद्धिमत्ता का मुख्य पैमाना मान लिया लेकिन एआई के विकास ने इस सोच को बदल दिया है. आज कई तकनीकी कार्य ऐसे हैं जिन्हें मशीनें इंसानों से कहीं अधिक तेज़ी से कर सकती हैं.बावजूद इसके केवल तकनीकी दक्षता को ही ‘स्मार्टनेस’ का संकेत मानना पर्याप्त नहीं रह गया है. उनके मुताबिक भविष्य में सबसे अधिक महत्व उन क्षमताओं का होगा जो इंसानों को मशीनों से अलग बनाती हैं जैसे संवेदनशीलता, इमोशन्स, समझ और दूरदृष्टि. (Photo Credit - AI Generated)
4.भावनाओं को समझने की क्षमता

हुआंग के अनुसार, बुद्धिमान व्यक्ति की पहली पहचान यह है कि वह दूसरों की भावनाओं और परिस्थितियों को समझ सके. यह क्षमता किसी भी निर्णय को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाती है. कार्यस्थल या सामाजिक जीवन में कई बार केवल डेटा पर्याप्त नहीं होता. लोगों की भावनाओं और प्रतिक्रियाओं को समझना भी उतना ही जरूरी होता है. (Photo Credit - AI Generated)
5.बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढलना

तेजी से बदलती दुनिया में अनुकूलन क्षमता भी बुद्धिमत्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा है. हुआंग मानते हैं कि जो लोग नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को जल्दी ढाल लेते हैं, वे अधिक प्रभावी निर्णय ले पाते हैं. तकनीक, अर्थव्यवस्था और कार्यशैली लगातार बदल रही है. ऐसे माहौल में लचीला दृष्टिकोण रखने वाले लोग अक्सर आगे निकल जाते हैं. लेकिन इस मामले में एआई यहां फेल होगा. (Photo Credit - AI Generated)
6.समस्या की जड़ तक पहुंचने की सोच

हुआंग का मानना है कि केवल आंकड़ों को देखना पर्याप्त नहीं है. असली बुद्धिमत्ता तब दिखती है जब कोई व्यक्ति समस्या की गहराई तक जाकर उसके कारणों को समझने की कोशिश करता है. डेटा विश्लेषण के साथ-साथ तार्किक सोच और संदर्भ की समझ भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है. जबकि एआई केवल और केवल डेटा के आधार पर ही निर्णय लेता है. (Photo Credit - AI Generated)
7.अनिश्चित परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता

कई बार जीवन और काम में ऐसी स्थितियां आती हैं जहां पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होती. ऐसे समय में सही निर्णय लेना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. हुआंग के अनुसार, बुद्धिमान व्यक्ति वही है जो सीमित जानकारी के बावजूद संतुलित और सोच-समझकर फैसला कर सके. लेकिन एआई के पास अगर इंपुट नहीं है तो वह यहां सही जानकारी या कोई भी जानकारी साझा नहीं कर सकेगा. (Photo Credit - AI Generated)
8.भविष्य की चुनौतियों को पहले पहचानना

इंसानों में एक और महत्वपूर्ण गुण है संभावित समस्याओं का पहले से अनुमान लगा लेना. यह क्षमता किसी व्यक्ति को बेहतर रणनीति बनाने में मदद करती है. हुआंग का मानना है कि मशीनें डेटा के आधार पर विश्लेषण कर सकती हैं, लेकिन दूरदृष्टि और अनुभव से आने वाली यह क्षमता अभी भी मुख्य रूप से मानव विशेषता है. (Photo Credit - AI Generated)
9.तकनीकी दुनिया के प्रभावशाली नेता

Jensen Huang तकनीकी उद्योग के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. उन्होंने 1993 में Nvidia की स्थापना की थी, जो आज दुनिया की अग्रणी चिप निर्माता कंपनियों में शामिल है. एआई तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग में कंपनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. इसी कारण हुआंग की राय को तकनीकी उद्योग में गंभीरता से सुना जाता है. (Photo Credit - AI Generated)
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