लाइफस्टाइल
ऋतु सिंह | Jul 15, 2025, 08:43 AM IST
1.पीढ़ीगत भावनाएं जो सदियों से चली आ रही हैं

द वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोलंबिया विश्वविद्यालय की मनोवैज्ञानिक और वन माइंड की सीईओ कैथलीन एम. पाइक कहती हैं कि यह भावना पीढ़ियों से चली आ रही है. हालाँकि यह शब्द आकर्षक लग सकता है, लेकिन कई लोगों के लिए यह अनुभव गंभीर हो सकता है.
2.चिंता के प्रमुख कारण

विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक और तंत्रिका विज्ञानी जैक नित्शेके के अनुसार, रविवार की चिंता के दो मुख्य कारण हो सकते हैं:
आने वाले सप्ताह का डर:
भविष्य हमेशा अनिश्चित होता है. आने वाले सप्ताह की योजनाओं के बारे में अनिश्चितता चिंता को बढ़ा देती है.
नियंत्रण की कमी
पॉडकास्ट 'द एंग्जायटी अचीवर' की होस्ट मोरा आयरन्स-मेले कहती हैं कि नौकरी और बॉस का हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है. नौकरी हमारी आजीविका, सामाजिक स्थिति और उद्देश्य की भावना का आधार होती है. नौकरी में कटौती या वित्तीय अनिश्चितता की खबरें इस चिंता को बढ़ा सकती हैं.
3.तब ये यह एक गंभीर समस्या हो सकती है

आयरन्स-मेले के अनुसार, रविवार को चिंता होना स्वाभाविक है, खासकर जब आप कोई नई नौकरी शुरू कर रहे हों या कोई बड़ा प्रेजेंटेशन देने वाले हों. लेकिन अगर आपको हर रविवार चिंता होती है या हर बार अपने मैनेजर से बात करते समय चिंता होती है, तो यह एक गंभीर समस्या है. ऐसे में, आपको किसी मनोचिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए. साथ ही, अपनी चिंता के कारणों को समझने की कोशिश करें. आपको कब और क्यों चिंता होती है? क्या कोई खास व्यक्ति या परिस्थिति आपकी चिंता का कारण बनती है? यह समझना ज़रूरी है.
4.रविवार की चिंता पर कैसे काबू पा पाते हैं?

अपना नज़रिया बदलें: ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर जडसन ब्रेवर कहते हैं, "जब आप 'संडे स्केयर' शब्द सुनते हैं, तो आप रविवार को तनावपूर्ण समझने लगते हैं. लेकिन रविवार अच्छा या बुरा नहीं होता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे देखते हैं. याद रखें कि आप रविवार के बाद सोमवार को आने से न तो रोक सकते हैं और न ही बदल सकते हैं. लेकिन आप अपने नज़रिए को नियंत्रित कर सकते हैं और तय कर सकते हैं कि आप इसे कैसे देखते हैं."
5.सकारात्मक बातें रिकॉर्ड करें

दो महीने तक, सोमवार और मंगलवार को होने वाली अच्छी बातों को रिकॉर्ड करें. उदाहरण के लिए, सहकर्मियों से मिली तारीफ़ या उनके साथ बिताए मज़ेदार पल. इससे आपको यह जानने में मदद मिलेगी कि आपकी रविवार की चिंताएँ जायज़ हैं या नहीं. इससे आपको यह एहसास भी होगा कि आपके सोमवार और मंगलवार दोनों ही समान रूप से सकारात्मक हैं.
6.सही योजना बनाएं

अपने हफ़्ते की सही योजना बनाएं और परिवार को भी इसमें शामिल करें. अपनी रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियों को लिख लें. इससे अनिश्चितता कम होगी और आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपके नियंत्रण में क्या है. जब आपको लगता है कि चीज़ें आपके नियंत्रण में हैं, तो चिंता कम हो जाती है.
7.खुद को ज़मीन से जुड़ा रखने की कोशिश करें:

जब भी घबराहट होने लगे तो वह अपनी परिवार या दोस्तों से बात करें, सोशल हों या पार्क आदि में घूमने निकल जाएं. कहने का मतलब ये है कि अपने दिमाग को डायवर्ट करें और किसी काम में मन लगाएं.
8.रविवार की चिंता एक आम भावना है

रविवार की चिंता एक आम भावना है. लेकिन इसे समझकर और सही कदम उठाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है. अपनी चिंता को पहचानें, उसके लिए योजना बनाएँ और सकारात्मक चीज़ों पर ध्यान केंद्रित करें.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)
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