लाइफस्टाइल
Abhay Sharma | Dec 04, 2025, 12:58 PM IST
1.लिव-इन का देसी वर्जन

बता दें कि भारत के आदिवासी बहुल राज्य झारखंड में सदियों पहले से ही लिव-इन रिलेशनशिप जैसी एक परंपरा चली आ रही है, आज की भाषा में इसे लिव-इन जैसा ही माना जाता है.
2.क्या है 'ढुकु प्रथा'?

इस प्रथा में जब कोई आदिवासी समाज के युवक-युवती एक-दूसरे को पसंद करने लगते हैं और किसी कारणवश उनके परिवार विवाह के लिए तैयार नहीं होते, तो युवक युवती को अपने घर ले आता है और पति-पत्नी की तरह साथ रहने लगते हैं. इनके बीच औपचारिक विवाह संस्कार नहीं होते हैं.
3.उम्र का भी कोई बंधन नहीं

इस प्रथा में उम्र का भी कोई बंधन नहीं होता है. युवक-युवती अगर अपनी इच्छा से साथ रहना चाहते हैं, तो वे बिना किसी सामाजिक रीति-रिवाजों के एक ही घर में रहने लगते हैं.
4.सामाजिक मान्यता

ढुकु विवाह करने वाले जोड़ों को बाद में सामाजिक मान्यता तभी मिलती है, जब ग्राम प्रधान या सामाजिक अगुवा की पहल पर पारंपरिक विधि-विधान या रीति रिवाज से विवाह करवा दिया जाता है.
5.गरीबी और अशिक्षा से जागरूकता की कमी

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ढुकु प्रथा जैसी परंपराओं के पीछे सबसे बड़ी वजह गरीबी, अशिक्षा और जागरूकता की कमी है. इसलिए ही नाबालिग उम्र में लड़के-लड़कियां इस प्रथा का हिस्सा बन जाते हैं. इसकी वजह से बाद में स्वास्थ्य और सामाजिक स्तर पर कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं.
6.सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है प्रथा

यह परंपरा सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं, बल्कि उन राज्यों में भी देखने को मिलती है जहां आदिवासी समुदाय निवास करते हैं. इसमें लड़का लड़की अगर एक-दूसरे को पसंद करते हैं तो लड़का लड़की को अपने घर ले आता है, दोनों साथ रहते हैं. बाद में फिर पारंपरिक विधियों से उनकी शादी करवा दी जाती है.सैकड़ों वर्षों से यह प्रथा चली आ रही है.
7.लिव-इन रिलेशनशिप

आदिवासी मामलों के जानकार और सामाजिक कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग के मुताबिक, दूसरे समुदायों में यही परंपरा लिव-इन रिलेशनशिप कहलाती है. फर्क इतना है कि शहरी समाज में इसे आधुनिकता का हिस्सा मानकर देखा जाता है और आदिवासी समाज में यह एक पुरानी सांस्कृतिक परंपरा के रूप में जीवित है. लेकिन, इन दोनों ही स्थितियों में समाज इसे सहजता से स्वीकार नहीं करता है. ऐसे में पारंपरिक विवाह ही सामाजिक मान्यता का आधार बनता है.
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