लाइफस्टाइल
ऋतु सिंह | Aug 10, 2025, 07:21 AM IST
1.पक्षी प्रेमियों के लिए बुरी खबर

अगर आपको पक्षियों से प्रेम है तो आपके लिए ये खबर बहुत काम की है, क्योंकि एक पक्षी ऐसा है जो आपके स्वास्थ्य को ही नहीं, आपकी जान तक पर खतरा बन सकता है. अक्सर लोगों के घरों के आसपास या सड़कों पर झुंड में ये पक्षी दिखते हैं और लोग दाने डालते हैं. जी हां हम बात कबूतरों की कर रहे हैं. ये जानलेवा बीमारियों का कारण होते हैं.
2.कबूतरखानों को बंद करने का जैन समुदाय कर रहा विरोध

मुंबई में इन दिनों कबूतरखानों का मुद्दा इस समय गरमाया हुआ है. मुंबई नगर निगम ने कबूतरखानों को बंद कर दिया है, वहीं जैन समुदाय और कुछ पक्षी प्रेमी इसका विरोध कर रहे हैं. दादर में जैन समुदाय सड़कों पर उतर आया और आक्रामक विरोध प्रदर्शन किया, कबूतरखानों के ऊपर रखे तिरपालों को हटा दिया तथा एक बार फिर भोजन फेंकना शुरू कर दिया. लेकिन क्या आपको पता है कबूतर सफेद हों या ग्रे और काले, सभी बीमारियों का घर हैं.
3.कबूतर से होने वाली 5 बीमारियां जानलेवा हैं

कबूतर, खासकर उनकी बीट और पंख, कुछ गंभीर स्वास्थ्य रोगों का कारण बन सकते हैं. आइए जानें कि ये रोग क्या हैं.
4. कबूतरों की सूखी बीट से फैलता है रोग

हिस्टोप्लाज़मोसिस एक फफूंद जनित रोग है जो कबूतरों की सूखी बीट के ज़रिए हवा में फैलता है. बीट में मौजूद फफूंद साँस के ज़रिए फेफड़ों में पहुँच जाता है और फेफड़ों में संक्रमण पैदा करता है. बुखार, खांसी, थकान, सीने में दर्द हो सकता है. गंभीर मामलों में, फेफड़े कमज़ोर हो सकते हैं.
5.क्रिप्टोकोकोसिस भी एक फंगल रोग है

क्रिप्टोकोकोसिस भी एक फंगल रोग है जो कबूतरों की बीट में पाए जाने वाले क्रिप्टोकोकस फंगस से होता है. यह फंगस साँस के ज़रिए शरीर में प्रवेश करता है और फेफड़ों और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है. इसके लक्षणों में सिरदर्द, बुखार, खांसी और गंभीर मामलों में मस्तिष्क में सूजन शामिल हैं.
6. फेफड़ों की बीमारी

अतिसंवेदनशीलता निमोनिया एक एलर्जी और सूजन वाली फेफड़ों की बीमारी है जो कबूतर की बीट में मौजूद फफूंद और पंखों के कारण होती है. बीट में मौजूद फफूंद या कबूतर के पंखों को साँस के ज़रिए अंदर लेने से फेफड़े क्षतिग्रस्त हो सकते हैं. इससे सांस लेने में तकलीफ, खांसी, थकान और गंभीर मामलों में फेफड़ों को स्थायी नुकसान हो सकता है.
7.अस्थमा का कारण

कबूतरों की बीट में मौजूद फफूंद और श्वसन संबंधी एलर्जी और अस्थमा का कारण बन सकती है. बीट में मौजूद फफूंद और रूसी हवा में एलर्जी पैदा करते हैं, जिससे श्वसन तंत्र संवेदनशील हो जाता है. इसके लक्षणों में खांसी, सांस लेने में तकलीफ, त्वचा पर चकत्ते और आँखों में खुजली शामिल हैं.
8.दस्त, बुखार, पेट दर्द और उल्टी

साल्मोनेलोसिस एक जीवाणु संक्रमण है जो कबूतरों की बीट से फैलता है. साल्मोनेला बैक्टीरिया दूषित पानी या भोजन के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है. इसके लक्षणों में दस्त, बुखार, पेट दर्द और उल्टी शामिल हैं.
9.60 प्रकार की श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा

शोध के अनुसार, कबूतरों की बीट से लगभग 60 प्रकार की श्वसन संबंधी बीमारियां हो सकती हैं. बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से इसका खतरा होता है.
डिसक्लेमरः ये खबर सामान्य जानकारी के आधार पर लिखी गई है, अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें
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