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Climate Anxiety : मौसम का बदलता मिजाज मस्तिष्क के लिए भारी, एंग्जाइटी और स्ट्रेस के ये लक्षण हैं रिस्की

कभी मूसलाधार बारिश तो कभी तेज गर्मी और कभी मौसम में अचानक से ठंडक आना सेहत के लिहाज से ही नहीं मस्तिष्क के हिसाब से भी सही नहीं है. मौसम का मिजाज मूड पर भारी पड़ रहा है.

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Climate Anxiety : मौसम का बदलता मिजाज मस्तिष्क के लिए भारी, एंग्जाइटी और स्ट्रेस के ये लक्षण हैं रिस्की

मौसम का असर दिमाग पर कैसा पड़ रहा?

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कुछ दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश को देखकर ऐसा लग रहा था कि मानों मानसून आ गया है, लेकिन मौसम फिर से गर्म हो गया है. गर्मी न केवल तापमान बढ़ाती है बल्कि मन और शरीर पर भी बुरा असर डालती है. कुछ लोग इसके कारण तनाव महसूस करते हैं. अगर आप भी ऐसे मौसम में अस्वस्थ, तनावग्रस्त, डिहाइड्रेटेड या कमज़ोर महसूस कर रहे हैं, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें.

हर मौसम अपने साथ कुछ नई परेशानियां लेकर आता है. गर्मियों में बहुत से लोग कमज़ोर महसूस करते हैं. जो लोग पहले से ही मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, उन्हें और भी ज़्यादा अस्वस्थता महसूस हो सकती है. ऐसा क्यों होता है? आइए समझते हैं.

ग्रीष्म ऋतु, मौसमी परिवर्तन और शारीरिक समायोजन

हमारा शरीर हर मौसम के हिसाब से ढल जाता है, लेकिन जब अचानक से तापमान बढ़ जाता है तो शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं. सबसे पहला असर हमारे शरीर के तापमान पर पड़ता है. जब बाहर की गर्मी बढ़ती है तो शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है. इसका असर हमारे दिमाग, दिल और दूसरे अंगों पर भी पड़ता है.

हार्ट और ब्लड प्रेशर पर प्रभाव

गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए दिल को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसका मतलब है कि दिल की धड़कन बढ़ जाती है और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव होने लगता है. जब दिल की धड़कन बढ़ जाती है, तो कई बार तेज़ साँस लेना, हाथ-पैर ठंडे पड़ जाना या थोड़ा अस्वस्थ महसूस होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.

मस्तिष्क पर प्रभाव

गर्मी के कारण नींद में खलल पड़ता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है. जब नींद पूरी नहीं होती है, तो चिड़चिड़ापन, डर और अचानक मूड स्विंग जैसी समस्याएं होती हैं. इसके साथ ही दिमाग में चल रही हर बात का शरीर पर भी गहरा असर पड़ता है. गर्मियों में सोचने-समझने की क्षमता कम हो जाती है और एकाग्रता में दिक्कत हो सकती है.

प्रतिरक्षा प्रणाली और रोग जोखिम

गर्मियों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमज़ोर हो जाती है. इससे पेट दर्द, फ़ूड पॉइज़निंग या त्वचा संबंधी समस्याएँ होने लगती हैं. जब शरीर बार-बार बीमार होता है, तो मन भी बेचैन हो जाता है, जिससे चिंता बढ़ जाती है.

सबसे अधिक कष्ट किसे होता है?

छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को गर्मी से सबसे ज़्यादा ख़तरा होता है. उनके शरीर का तापमान तेज़ी से गिरता है और उनका मूड अस्थिर हो जाता है. अगर किसी को पहले से ही चिंता या बेचैनी है, तो गर्मी उसे और भी बदतर बना सकती है.

स्वस्थ आदतें: आहार, पानी, नींद, व्यायाम - स्वस्थ जीवन की कुंजी

खूब पानी पिएं: जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो थकान और चक्कर आने लगते हैं.
ठंडा और हल्का भोजन खाएं: ताजे फल, सलाद और नींबू पानी पीना फायदेमंद है.

पर्याप्त नींद लें: दिन भर की थकान और गर्मी के कारण रात को अच्छी नींद लेना महत्वपूर्ण है.

धूप से दूर रहें: दोपहर में बाहर जाने से बचें, विशेषकर जब धूप सिर पर हो.

अपने मन को शांत करने का प्रयास करें: ध्यान, प्राणायाम या पैदल चलना आपके मन को शांत करने में मदद कर सकता है.
 
अगर इसके बाद भी आपको परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें. समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से आपके शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में मदद मिलेगी.

(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. इस पर अमल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)

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