लाइफस्टाइल
जैश-ए-मोहम्मद ने महिलाओं की भर्ती के लिए 'तुफात अल-मुमिनात' नामक एक ऑनलाइन "जिहादी पाठ्यक्रम" शुरू किया है, जिसका नेतृत्व मसूद अजहर की बहन और उमर फारूक की पत्नी करेंगी.
अक्टूबर महीने की शुरुआत में यह खुलासा हुआ था कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित पाकिस्तान प्रायोजित जैश-ए-मोहम्मद, 'जमात-उल-मुमिनात' नाम से एक महिला ब्रिगेड बना रहा है. अब एक नए एक्सक्लूसिव दस्तावेज़ और विवरण के अनुसार, इस आतंकी समूह ने धन जुटाने और अपनी महिला ब्रिगेड में ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं की भर्ती के लिए एक ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किया है. इस पाठ्यक्रम का नाम 'तुफ़ात अल-मुमिनात' रखा गया है.
मसूद अजहर की बहनों को मिली जिम्मेदारी
संगठन को मज़बूत करने और महिला ब्रिगेड में और अधिक महिलाओं की भर्ती के लिए, यह पाठ्यक्रम जैश-ए-मोहम्मद के नेताओं, जिनमें मसूद अज़हर और उसके कमांडर के रिश्तेदार भी शामिल हैं, की महिला परिवार की सदस्यों को जिहाद, धर्म और इस्लाम के दृष्टिकोण से महिलाओं के कर्तव्यों का प्रशिक्षण देगा. भर्ती अभियान 8 नवंबर से ऑनलाइन लाइव व्याख्यानों के माध्यम से शुरू होगा. मसूद अज़हर की दो बहनें, सादिया अज़हर और समायरा अज़हर, महिलाओं को जैश-ए-मोहम्मद की महिला ब्रिगेड 'जमात-उल-मुमिनात' में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु एक ऑनलाइन मीटिंग प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से प्रतिदिन 40 मिनट की कक्षाएं संचालित करेंगी.
After creating a women’s brigade — “Jamat ul-Muminat”
— Anish Singh (@anishsingh21) October 22, 2025
Jaish-e-Mohammed has now launched an Online Jihadi Course ‘Tufat al-Muminat’ to recruit women.
Masood Azhar’s Sisters and Umar Farooq’s Wife to Lead, Each Participant Charged ₹500 Donation#Pakistan #pakistanileaks pic.twitter.com/dxcWZOhSN5
जिस तरह मसूद अजहर चंदा इकट्ठा करने का कोई मौका नहीं छोड़ता है और 27 सितंबर को बहावलपुर में मरकज उस्मान ओ अली में अपने नवीनतम भाषण में धन जुटाने की अपील करता है, उसी तरह जैश-ए-मोहम्मद अब पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाली प्रत्येक महिला से 500 पाकिस्तानी रुपये का चंदा इकट्ठा कर रहा है और उनसे एक ऑनलाइन सूचना फॉर्म भी भरवा रहा है.
इसकी शुरुआत में 8 अक्टूबर को मसूद अज़हर ने जैश-ए-मोहम्मद की महिला ब्रिगेड 'जमात-उल-मुमिनात' के गठन की घोषणा की थी और 19 अक्टूबर को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के रावलपिंडी में महिलाओं को एकजुट करने के लिए 'दुख्तरान-ए-इस्लाम' नामक एक कार्यक्रम आयोजित किया था. सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में सख्त सामाजिक मानदंडों के कारण, महिलाओं का अकेले बाहर निकलना अक्सर अनुचित माना जाता है, इसलिए जैश-ए-मोहम्मद अब महिलाओं की भर्ती के लिए ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल कर रहा है. ताकि वे ISIS, हमास और LTTE की तर्ज पर पुरुष आतंकवादी ब्रिगेड के साथ मिलकर एक महिला आतंकवादी ब्रिगेड बना सकें और संभावित रूप से उनका इस्तेमाल आत्मघाती/फिदायीन हमलों के लिए कर सकें.
जैश के पूरे ऑपरेशन के तहत, प्रत्येक महिला से 500 पाकिस्तानी रुपये का चंदा लिया जा रहा है, जो पाकिस्तान के दोगलेपन को उजागर करता है. एक तरफ, पाकिस्तान एफएटीएफ के नियमों को घरेलू स्तर पर लागू करने का दावा करता है, वहीं दूसरी तरफ, उसके द्वारा पोषित समूह, जो मरकज़ (केंद्रों) के नाम पर खुलेआम चंदा इकट्ठा कर रहे थे, अब ऑनलाइन कक्षाओं के नाम पर चंदा इकट्ठा कर रहे हैं.
नवगठित जमात-उल-मुमिनीन में मौलाना मसूद अज़हर ने इस महिला ब्रिगेड की कमान अपनी छोटी बहन सादिया अज़हर को सौंपी है, जिनके पति यूसुफ़ अज़हर ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए थे. उन्होंने शूरा में अपनी छोटी बहन सफ़िया और पुलवामा आतंकी हमले को अंजाम देने वाले और बाद में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए उमर फ़ारूक़ की पत्नी अफ़रीरा फ़ारूक़ को भी शामिल किया है.
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