लाइफस्टाइल
शोधकर्ताओं ने एक ऐसे Chemical Messenger की पहचान की है जो त्वचा को छूने पर मस्तिष्क को एक सुखद अहसास दिलाता है.
डीएनए हिंदी: अक्सर जब कोई व्यक्ति किसी से हाथ मिलाता है, गले लगाता है या दुलारते है तो यह हमें मनोवैज्ञानिक ( Psychological ) रूप से प्रोत्साहित करता है. यह हमारे भावनात्मक सुख और स्वास्थ्य के विकास के लिए बहुत जरूरी है. अब हाल ही में आई वाशिंगटन यूनिवसर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ रिसर्चर ने एक ऐसे सर्किट की पहचान ( Chemical Messenger ) की है जो त्वचा को छूने पर मस्तिष्क को एक सुखद अहसास दिलाता है. इसके साथ ही रिसर्चर ने एक न्यूरोपेप्टाइड की खोज भी की है जो कोशिकाओं के बीच मैसेज या मानसिक संकेत को भेजने का काम करता है.
यह इसलिए भी खास है क्योंकि दुनियाभर के मनोवैज्ञानिक अब तक ये पता नही कर पाए थे कि वो कौनसा सर्किट/हार्मोन या नर्व है जो हमे किसी के छूने या स्पर्श करने से सुखद अहसास दिलाता है. लेकिन अब वाशिंगटन यूनिवसर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन ( Washington University School of Medicine ) के शोधकर्ताओं ने उसे खोज निकाला है.
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प्रोकिनेक्टिकीन 2 नाम का न्यूरो पेप्टाइड के बिना प्रजनन वाले चूहों पर किए गए शोध में यह सामने आया है कि वे सुखद अहसासों के स्पर्श के संकेतों को महसूस ही नहीं कर पाए. इस यह स्पष्ट हुआ है कि चाहे गले लगाना हो, हाथ मिलाना हो या एक मां का अपने बच्चों को दुलार करना हो , ये सभी सुखद स्पर्श मस्तिष्क में कई होर्मोन को बढ़ाते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्पर्श बहुत जरूरी है.
दिल्ली, नोएडा में कुछ लोगों पर हुए एक शोध में यह सामने आया कि सुखद स्पर्श के अनुभव से न सिर्फ बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है, बल्कि युवाओं में भी एक दूसरे से गले मिलने से एक नई ऊर्जा का संचार होता है जो इन्हें सुखद अहसास का अनुभव कराता है.
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