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क्यों मनाया जाता है World Homeopathy Day? जानें कैसे हुई थी शुरुआत और क्या है इस बार की थीम

जर्मन मूल के फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन को होमियोपैथी का जनक माना जाता है. 10 अप्रैल को उनका जन्म हुआ था.

क्यों मनाया जाता है World Homeopathy Day? जानें कैसे हुई थी शुरुआत और क्या है इस बार की थीम
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डीएनए हिंदी: दुनिया भर में 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस (World Homeopathy Day) मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का एकमात्र लक्ष्य लोगों को होम्योपैथिक के प्रति जागरूक करना है. आज विश्व के लगभग 100 देशों में मरीजों का इलाज होम्योपैथी से किया जा रहा है. होम्योपैथी पद्धति जहां कोई नुकसान नहीं करती है, वहीं इसकी दवाओं की लागत भी बहुत अधिक नहीं होती है. होम्योपैथी से जटिल से जटिल रोग को जड़ से मिटाया जा सकता है. आइए जानते हैं विश्व होम्योपैथी दिवस का इतिहास और अन्य महत्वपूर्ण बातें-

क्या है होम्योपैथी? 
होम्योपैथी यूनानी शब्द होमो और पैथोस से आया है. इसमें होमो का अर्थ 'समान' और पैथोस का अर्थ है 'दुःख या बीमारी' है. केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के अनुसार, यह चिकित्सा का ही एक वैकल्पिक रूप है जो 'समरूपता' दवा सिद्धांत पर आधारित है. इस पद्धति में रोगियों का उपचार न केवल होलिस्टिक दृष्टिकोण के माध्यम से, बल्कि रोगी की व्यक्तिवादी विशेषताओं को समझकर किया जाता है.

क्या है इतिहास?
जर्मन मूल के फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन को होमियोपैथी का जनक माना जाता है. 10 अप्रैल को उनका जन्म हुआ था. कहा जाता है कि उन्होंने ही लोगों को होमियोपैथी के भविष्य के बारे में अवगत कराया था. इस साल उनकी 267वीं जयंती है.  

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क्या है उद्देश्य?
विश्व होम्योपैथी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा की इस अलग प्रणाली के बारे में जागरूकता पैदा करना और इसे आसानी से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है. इसके लिए हर साल भारत सरकार (Government of India) द्वारा एक थीम जारी की जाती है. इस साल यह थीम 'Homoeopathy: People's Choice for Wellness' रखी गई है.

आज के समय में होम्योपैथी काफी प्रचलित है. दुनियाभर में लोग इस पद्धति को काफी महत्व देते हैं. भारत सहित विश्व के कई देश होम्योपैथी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. यह एक सुरक्षित चिकित्सकीय तरीका है जो कई प्रकार की बीमारियों का प्रभावी उपचार कर सकता है. इसकी आदत भी नहीं पड़ती है साथ ही यह गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सभी के लिए भी सुरक्षित है.

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