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आराम पसंद लोग हो जाएं सावधान, ज्यादा देर तक बैठे रहने से कमजोर हो सकती है आपकी याददाश्त!

ज्यादा आराम पसंद जिंदगी जीने वाले लोगों का मस्तिष्क सिकुड़ने लगता है जिसकी वजह से कई तरह की मानसिक समस्याएं हो सकती हैं.

आराम पसंद लोग हो जाएं सावधान, ज्यादा देर तक बैठे रहने से कमजोर हो सकती है आपकी याददाश्त!
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डीएनए हिंदी: कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते आज हम एक बार फिर अपने-अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं. इस दौरान अधिकतर लोग वर्क फ्रॉम होम (Work from Home) कर रहे हैं और अपना ज्यादातर समय घंटों एक ही जगह बैठकर बिता रहे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका असर आपकी याददाश्त पर पड़ सकता है?

हाल ही में हुई एक रिसर्च में देर तक बैठे रहने से जुड़े कुछ चौकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. लॉस एंजिलिस स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं द्वारा की गई इस रिसर्च में 45 से 75 साल की उम्र वाले 35 लोगों को शामिल किया गया. वैज्ञानिकों ने इन लोगों से इनके रोजाना की शारीरिक गतिविधि और उनके बैठे रहने की अवधि इत्यादि के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की. साथ ही हर व्यक्ति के मस्तिष्क के एक खास हिस्से 'मेडियल टैम्पोरल लॉब' (MTL) का हाई रेजोल्यूशन वाला एमआरआई स्कैन किया गया.

शोध के दौरान जब इस हिस्से की जांच की गई तो पता चला कि जो लोग ज्यादा आरामदायक जीवनशैली अपनाते हैं, उनमें वो हिस्सा काफी पतला है. इस शोध को जर्नल प्लस वन में प्रकाशित किया गया है. 

शोधकर्ताओं ने बताया, 50 साल या उसके आस पास की उम्र के लोगों में देर तक बैठे रहने से डिमेंशिया का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. उन्होंने कहा, ज्यादा आराम पसंद जिंदगी जीने वाले लोगों का मस्तिष्क इस उम्र में सिकुड़ने लगता है जिसकी वजह से कई तरह की मानसिक समस्याएं हो सकती हैं.

एमटीएल के पतले होने का सीधा मतलब है कि उस इंसान के सोचने समझने और चीजों को याद रखने की क्षमता कमजोर हो रही है जिससे आगे चलकर याददाश्त कमजोर होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ती उम्र में अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियां आम हैं. (आम भाषा में डिमेंशिया को भूलने की बीमारी कहा जाता है. हालांकि यह बीमारी का नहीं बल्कि एक बड़े लक्षणों के ग्रुप का नाम है. इस बीमारी में भूलने के अलावा बातें याद करने में दिक्कत होना, लॉजिक को समझ न पाना, लोगों से मिलने-जुलने में झिझक, इमोशंस को संभालने में दिक्कत, पर्सनैलिटी चेंज, आदि जैसे लक्षण देखे जाते हैं. ये सभी लक्षण ब्रेन लॉस के कारण होते हैं.)

इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप शारीरिक सक्रियता बढ़ाएं और आरामपसंद जीवनशैली से परहेज करें. साथ ही लोग अपनी डाइट में बदलाव करके भी दिमागी बीमारियों के जोखिम से आसानी से बच सकते हैं. इसके लिए उन्हें बस एंटी-इंफ्लामेटरी फल और सब्जियों का सेवन करना होगा.

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