Advertisement

Sanjay Raut को जेल से निकलने के लिए अभी करना पड़ेगा इंतजार! फिर बढ़ी न्यायिक हिरासत

Patra Chawl Land Scam: कोर्ट ने शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत की न्यायिक हिरासत को फिर 14 दिन के लिए बढ़ा दिया है.

Sanjay Raut को जेल से निकलने के लिए अभी करना पड़ेगा इंतजार! फिर बढ़ी न्यायिक हिरासत

शिवसेना नेता संजय राउत (फाइल फोटो-PTI)

Add DNA as a Preferred Source

डीएनए हिंदी: पात्रा चॉल घोटाले (Patra Chawl Land Scam) में शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं. संजय राउत को अभी जेल में ही रहना होगा. विशेष अदालत ने राउत की न्यायिक हिरासत को 14 दिनों के लिया बढ़ा दिया है. इससे पहले ईडी ने संजय राउत की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दावा किया था कि पात्रा चॉल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी. वह पर्दे के पीछे काम कर रहे थे.  

गौरतलब है कि ईडी ने इस मामले में शुक्रवार को चार्जशीट दाखिल की थी. कोर्ट ने जांच एजेंसी की चार्जशीट को संज्ञान में लेते हुए संजय राउत की हिरासत 14 दिन बढ़ाने का निर्देश दिया है. वहीं कोर्ट के निर्देश पर ED ने राउत को चार्जशीट की एक कॉपी सौंप दी है. संजय राउत के वकील ने चार्जशीट की एक प्रति की मांग की थी. शिवसेना राज्यसभा सांसद को इस मामले में जुलाई में गिरफ्तार किया गया था. तब से ही वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं.

ये भी पढ़ें- Bhagwant Mann को प्लेन से उतारा गया? सुखबीर बादल ने लगाए गंभीर आरोप

'मनी लॉन्ड्रिंग से बचने के लिए संजय राउत का खेल'
ईडी ने संजय राउत की इस दलील को खारिज किया कि उनके खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक बदले के रूप में की गई है. जांच एजेंसी ने कहा कि आरोपी ने अपने प्रॉक्सी और करीबी सहयोगी प्रवीण राउत (सह-आरोपी) के जरिए अपराध में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. मनी लॉन्ड्रिंग से बचने के लिए संजय राउत पर्दे के पीछे से काम कर रहे हैं.’ ईडी पात्रा चॉल पुन:विकास परियोजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है। उपनगर गोरेगांव में स्थित सिद्धार्थ नगर, जोकि पात्रा चॉल के नाम से लोकप्रिय है. 47 एकड़ से ज्यादा भूमि में फैला हुआ है और उसमें 672 किराएदार परिवार रहते थे.

ये भी पढ़ें- 'धर्म भरोसे' अकालियों की सियासत, कैदियों की रिहाई को मुद्दा बना पाएगा बादल परिवार?

1,034 करोड़ में बेची थी जमीन
महाराष्ट्र आवासीय आर क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (महाडा) ने 2008 में पात्रा चॉल के पुन:विकास का काम HDIL से जुड़ी कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रेक्शन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा था. निविदा के अनुसार, कंस्ट्रक्शन कंपनी को किराएदारों के लिए 672 फ्लैट बनाने थे और कुछ फ्लैट उसे महाडा को भी देने थे. बाकी बची जमीन वह निजी डेवलपर्स को बेच सकता था. लेकिन 14 साल बाद भी किराएदारों को एक फ्लैट नहीं मिला क्योंकि कंपनी ने पात्रा चॉल का पुन:विकास नहीं किया और सारी जमीन को दूसरे बिल्डरों को 1,034 करोड़ रुपये में बेच दी.

देश-दुनिया की ताज़ा खबरों Latest News पर अलग नज़रिया, अब हिंदी में Hindi News पढ़ने के लिए फ़ॉलो करें डीएनए हिंदी को गूगलफ़ेसबुकट्विटर और इंस्टाग्राम पर. 

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement