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Jharkhand: अवैध खनन मामले में CM हेमंत सोरेन से पूछताछ, ED दफ्तर के बाहर धारा 144 लागू

Jharkhand Illegal Mining Case: ईडी के सामने पेश होने से पहले सीएम हेमंत सोरेन ने एक पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने ED की जांच पर सवाल उठाए हैं.

Jharkhand: अवैध खनन मामले में CM हेमंत सोरेन से पूछताछ, ED दफ्तर के बाहर धारा 144 लागू

हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है.

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डीएनए हिंदी: झारखंड में कथित खनन घोटाला मामले (Illegal Mining Case) में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं. थोड़ी देर बाद सीएम हेमंत सोरेन प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश होंगे. इससे देखते हुए ईडी दफ्तर में सुरक्षा के पुख्ता इतंजाम किए गए हैं. साथ ही रांची के हिनू इलाके में ईडी दफ्तर के आसपास लगभग 2 किलोमीटर के एरिया में धारा 144 लगा दी गई है. 

रांची के मजिस्ट्रेट दीपक दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री से पूछताछ के दौरान JMM कार्यकर्ताओं और अन्य संगठनों ने धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी है. इसी के मद्देनजर ईडी के कार्यालय के पास सुबह 10:30 बजे से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लागू कर दी गई है. अधिकारी ने बताया कि ईडी कार्यालय के आस-पास बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. इस बीच सीएम हेमंत सोरेने ने कहा कि वह ईडी कार्यालय जा रहे हैं. ईडी ने सोरेन को राज्य में कथित अवैध खनन से जुड़े धन शोधन मामले में गुरुवार को पूछताछ के लिए यहां अपने क्षेत्रीय कार्यालय में तलब किया है.

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3 नवंबर को ED के सामने पेश नहीं हुए थे सोरेन
इससे पहले ईडी ने हेमंत सोरेन को 3 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन वह आधिकारिक व्यस्तताओं का हवाला देते हुए पेश नहीं हुए थे. एजेंसी ने पेश नहीं पर उन्हें गिरफ्तार करने की भी चुनौती दी थी. इसके बाद उन्होंने समन को तीन सप्ताह के लिए टालने का अनुरोध किया. ईडी ने कहा है कि उसने राज्य में अब तक 1,000 करोड़ रुपये के अवैध खनन से संबंधित घोटाले का पता लगाया है.

हेमंत सोरेन ने लिखा पत्र

हेमंत सोरेन ने ईडी की जांच पर उठाए सवाल
वहीं, ईडी के सामने पेश होने से पहले सीएम हेमंत सोरेन ने एक पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने ईडी की जांच पर सवाल उठाए हैं. सोरेन ने कहा कि यह कुछ नहीं बल्कि सरकार को अस्थिर करने की कोशिश है. इसमें राज्यपाल भी केंद्र के इशारे पर राजनीति कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की भावना बरकरार रहनी चाहिए, संवैधानिक पद पर बैठे लोग जिम्मेदारी से काम करें.

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