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Indian Railway: 88 साल बाद रेल नेटवर्क से जुड़ेगा मिथिलांचल, कम हो जाएगी इन शहरों के बीच दूरी

मधुबनी और सुपौल के बीच रेल लाइन पर ट्रेन की शुरुआत हो गई है. पढ़ें बिंदु भूषण ठाकुर की रिपोर्ट.

Indian Railway: 88 साल बाद रेल नेटवर्क से जुड़ेगा मिथिलांचल, कम हो जाएगी इन शहरों के बीच दूरी

1934 से ही टूट गया था यह ब्रिज. (फाइल फोटो)

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डीएनए हिंदी: मिथिलांचल (Mithilanchal) को आज बड़ी सौगात मिली है. 88 साल के बाद कोसी नदी की वजह से अलग-अलग दो हिस्‍सों में बंटा मिथिलांचल रेल नेटवर्क से आज जुड़ गया है. यह पहल मिथिलांचल के लोगों की जिंदगी आसान करने वाली है. 

कोसी नदी पर पुल न होने की वजह से एक से दूसरी तरफ जाने के लिए लोगों को बड़ी दूरी तय करनी पड़ती थी. अब यह दूरी करीब 100 किलोमीटर कम हो जाएगी. रेलवे नेटवर्क के जरिए ट्रेन की शुरुआत होने के बाद अब यहां के लोग सीधी यात्रा कर सकेंगे.

पुल पर ट्रैफिक की शुरुआत के बाद झंझारपुर से सहरसा की दूरी तकरीबन 100 किलोमीटर तक कम हो जाएगी. रेल मंत्री ने अश्‍विनी वैष्‍णव दिल्‍ली से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोसी रेलवे पुल से गुजरने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है.

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आसान हो जाएगी इन लोगों की जिंदगी

मधुबनी के झंझारपुर से सुपौल के कुपहा तक 38 किलोमीटर रेल लाईन पर ट्रेन दौड़ने लगी है. इस ट्रैक के चालू हो जाने की वजह से चार जिलों के बीच ट्रेन ट्रैफिक आसान हो गई है. दरभंगा, मधुबनी, सुपौल और सहरसा में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगी इस फैसले से आसान होने वाली है.

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1934 में टूट गया था यह पुल

इस रेलवे ट्रैक पर 3 ट्रेन चलाई जा सकेगी. 88 साल बाद रेल मार्ग से मिथिलांचल जुड़ रहा है. इसके जरिए करीब 30 लाख लोगों को लाभ पहुंचेगा. साल 1934 के भूकंप में रेल महासेतु के टूट जाने की वजह से यह रूट बंद हो गया था. साल 2012 में एक बार फिर से इस रूट पर काम शुरू हुआ. 10 साल में यह ट्रैक एक बार फिर से चालू हो गया है. ट्रैक की शुरुआत होने की वजह से यहां की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और किसानों को भी बड़ा लाभ मिलेगा.

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