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नोएडा का ट्विन टावर तो ढह गया लेकिन अवैध निर्माण तले दब रही है दिल्ली!

देश में अवैध निर्माण के प्रतीक नोएडा ट्विन टावर रविवार को जमींदोज हो गया. लेकिन, देश में अवैध निर्माण के खिलाफ नई बहस छिड़ गई है. सिर्फ राजधानी दिल्ली में हजारों की संख्या में अवैध रूप से बनी इमारतें खड़ी हैं...

नोएडा का ट्विन टावर तो ढह गया लेकिन अवैध निर्माण तले दब रही है दिल्ली!

नोएडा ट्विन टावर

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डीएनए हिन्दी: देश में करप्शन और अवैध निर्माण के प्रतीक नोएडा का ट्विन टावर (Noida Twin Towers) रविवार को जमींदोज हो गया. लेकिन, अब पूरे देश में अवैध निर्माण को लेकर नई बहस छिड़ गई है. खासकर दिल्ली-एनसीआर में. इन इलाकों में गैरकानूनी ढंग से बनी कई इमारतें आज भी खड़ी हैं.

आंकड़ों के मुताबिक राजधानी दिल्ली में अवैध निर्माण के चलते 1,000 से ज्यादा प्रॉपर्टी या तो ध्वस्त किया जाता है या फिर उनकी सीलिंग की जाती है. दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी दिल्ली नगर निगम और डीडीए के पास है. डीडीए ने तो इसके लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स भी गठित किया है. लेकिन, आश्चर्य यह है कि इन्हीं दोनों संस्था के अधिकारी ही दिल्ली में अवैध निर्माण के लिए दोषी भी हैं. 

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डीडीए के स्पेशल टास्क फोर्स की मानें तो दिल्ली में प्रति माह अवैध निर्माण की 1,000 से ज्यादा शिकायतें आती हैं. वहीं दिल्ली नगर निगम के पास ऐसी शिकायतों का संख्या प्रतिवर्ष 15,000 से अधिक हैं. ज्यादातर शिकायतों के खिलाफ कार्रवाई करने में नगर निगम नाकाम साबित होता है. जहां तक डीडीए के स्पेशल टास्क फोर्स की बात है वहां 70 फीसदी से ज्यादा अवैध निर्माण की शिकायतें पेंडिंग हैं. यही वजह है कि लोग जमकर अवैध निर्माण कर रहे हैं.

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शहरीकरण के कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि दिल्ली का कानून भी इस तरह के अवैध निर्माण को संरक्षित करने का काम करता है. दिल्ली में अवैध निर्माण को बढ़ावा देने में स्पेशल प्रोविजन एक्ट 2007 का प्रमुख योगदान है. इस एक्ट की आड़ में दिल्ली में लगातार अवैध निर्माण को संरक्षित किया जाता रहा है. इस एक्ट की वजह से दिल्ली में कई अवैध निर्माण नियमित भी हो गए हैं.

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