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भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग हो गई है. स्काईरूट का विक्रम-1 भारत के लिए गेमचेंजर क्यों है? यहां पढ़ें'मिशन आगमन' की 10 बड़ी उपलब्धियों के बारे में.
भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग के साथ देश के निजी स्पेस सेक्टर ने नया इतिहास रच दिया है. श्रीहरिकोटा से लॉन्च होने वाला स्काईरूट एयरोस्पेस का यह 'विक्रम-1' रॉकेट देश की तकनीकी क्षमता को दिखा रहा है. साथ ही, यह 44 अरब डॉलर के अंतरिक्ष बाजार में भी भारत की स्थिति को मजबूत कर रहा है. इसी के साथ आइए, जानते हैं वो 10 बड़ी बातें, जो 'मिशन आगमन' को इतना खास बनाती हैं.
विक्रम-1 की यह उड़ान केवल एक रॉकेट लॉन्च नहीं है, बल्कि यह भारत के अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक गेमचेंजर है. यह मिशन साबित करता है कि भारतीय स्टार्टअप्स अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए तैयार हैं. स्काईरूट एयरोस्पेस के 'विक्रम-1' रॉकेट के बारे में जानने के लिए 10 ऐतिहासिक उपलब्धियां इस प्रकार हैं-
A historic new frontier for India’s space journey!
— Narendra Modi (@narendramodi) July 18, 2026
At 11:30 AM today, Skyroot Aerospace will undertake the maiden orbital launch of Vikram-1, India’s first privately developed launch vehicle.
This four-stage rocket is designed to provide rapid and on-demand launch services.… pic.twitter.com/1qFVTwNOuZ
विक्रम-1 भारत का पहला ऐसा रॉकेट है जिसे किसी निजी कंपनी ने बनाया है. यह सरकारी अंतरिक्ष कार्यक्रमों से निकलकर उद्योग-संचालित मिशनों की ओर भारत का एक बड़ा कदम है.
यह स्काईरूट एयरोस्पेस की पहली उड़ान है. भारत में कोई निजी कंपनी पहली बार अपने दम पर रॉकेट को कक्षा (Orbit) में भेजने की कोशिश कर रही है.
Vikram-1 Test Flight-1's journey from lift-off at the historic first launch pad in Sriharikota 🚀#Vikram1 #OpeningSpaceForAll #SkyrootAerospace pic.twitter.com/DNMOyrdLjF
— Skyroot Aerospace (@SkyrootA) July 18, 2026
यह भारत का पहला रॉकेट है जिसे पूरी तरह से कार्बन कंपोजिट से बनाया गया है. यह स्टील की तुलना में हल्का और कहीं अधिक मजबूत है, जिससे रॉकेट की कार्यक्षमता बढ़ जाती है.
इस रॉकेट में पहली बार पूरी तरह से 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन का उपयोग किया गया है. यह तकनीक रॉकेट निर्माण में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी.
विक्रम-1 का पहला हिस्सा (Stage) देश का सबसे लंबा 'मोनोलिथिक कार्बन कंपोजिट' स्टेज है, जो भारत की इंजीनियरिंग कुशलता को दर्शाता है.

इसमें स्टेज अलग करने के लिए खास तरह की न्यूमेटिक (Pneumatic) प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है, जो भारत में पहली बार देखी जा रही है.
मिशन में एक रोबोटिक आर्म तकनीक ले जाई जा रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य में अंतरिक्ष के कचरे को साफ करना है.

इस मिशन में डॉ. विक्रम साराभाई, सर सी.वी. रमन और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म मूर्तियां (Micro Sculptures) भेजी जा रही हैं, जो विज्ञान और कला का संगम है.

मिशन में 'कॉस्मिक ब्लूम' नाम का एक लैब में बना हीरा भी भेजा जा रहा है, जो अंतरिक्ष में कमर्शियल और सांस्कृतिक प्रयोग को दर्शाता है.

इस मिशन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'वंदे मातरम' संदेश और दुनिया भर के लोगों की शुभकामनाएं अंतरिक्ष में भेजी जा रही हैं, जो देश की सामूहिक आकांक्षाओं का प्रतीक है.
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