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India Operation Sindoor: आपरेशन सिंदूर के लिए भारत ने पाकिस्तान पर हवाई हमले के लिए बहावलपुर को ही क्यों चुना?

Why India choose Bahawalpur for air strikes: भारतीय सेना ने नौ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें जांश-ए-मोहम्मद मुख्यालय भी शामिल था, जिसे नष्ट कर दिया गया. लेकिन, भारतीय सेना ने बदला लेने के लिए पाकिस्तान के बहावलपुर को ही क्यों चुना?

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India Operation Sindoor: आपरेशन सिंदूर के लिए भारत ने पाकिस्तान पर हवाई हमले के लिए बहावलपुर को ही क्यों चुना?

भारत ने पाकिस्तान पर हवाई हमले के लिए बहावलपुर को ही क्यों चुना?

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भारत ने ऐतिहासिक ट्राई सर्विसेज ऑपरेशन में पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया. भारतीय सेना ने पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए 26 लोगों की मौत का बदला लिया. भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकवादी शिविरों को नष्ट कर दिया है तथा 'ऑपरेशन सिंदूर' को सफलतापूर्वक पूरा किया है.

भारतीय सेना ने नौ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें जांश-ए-मोहम्मद मुख्यालय भी शामिल था, जिसे कथित तौर पर नष्ट कर दिया गया. इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने तीन शहरों बहावलपुर, कोटली और मुजफ्फराबाद में आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया. लेकिन, पाकिस्तान का बहावलपुर भारतीय सेना का निशाना क्यों बनाया, चलिए जानें?  

भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ रात के समय अभियान चलाया. पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा डीजी आईएसपीआर ने कोटली, मुरीदके और बहावलपुर सहित नौ स्थानों पर भारतीय हमलों की पुष्टि की है. इसका नाम 'ऑपरेशन सिंदूर' रखा गया है. मुख्य लक्ष्य जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और लश्कर-ए-तैयबा जैसे जिहादी समूह थे, जो पिछले तीन दशकों से भारत में बड़े आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार हैं.  

भारत का लक्ष्य केवल बहावलपुर ही क्यों था?

पाकिस्तान का बारहवां सबसे बड़ा शहर बहावलपुर जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ है. यह शहर लाहौर से लगभग 400 किमी दूर है और जैश का मुख्यालय 'जामिया मस्जिद सुभान अल्लाह' क्षेत्र में स्थित है, जिसे उस्मान-ओ-अली परिसर के नाम से भी जाना जाता है. यह इलाका 18 एकड़ में फैला हुआ है और जैश-ए-मोहम्मद के लिए भर्ती, वित्तपोषण और प्रशिक्षण का केंद्र है. भारतीय हमले में यहां की मस्जिद को भी निशाना बनाया गया था. जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर बहावलपुर का निवासी है और वहां उच्च सुरक्षा वाले इलाके में रहता है.

जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) पर 2002 में आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन यह कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित रही. जैश-ए-मोहम्मद को अपने शिविर चलाने की पूरी आजादी दी गई है. जैश-ए-मोहम्मद का यह ठिकाना पाकिस्तान की 31वीं कोर के मुख्यालय से थोड़ी दूरी पर स्थित है. वहाँ एक सैन्य शिविर है. बहावलपुर में एक गुप्त परमाणु संयंत्र भी स्थित है. इस कैंप के पास कैंप की मौजूदगी जैश-ए-मोहम्मद को आईएसआई से मिल रहे समर्थन और संरक्षण का सबसे बड़ा सबूत है.

जामिया मस्जिद सुभान अल्लाह, जो एक मदरसा है, को अल-रहमत ट्रस्ट द्वारा वित्त पोषित किया गया था, जो जैश-ए-मोहम्मद का एक मुखौटा संगठन है. 2011 तक यह एक साधारण इमारत थी, लेकिन 2012 तक इसे एक बड़े प्रशिक्षण केंद्र में बदल दिया गया. उपग्रह चित्रों से पता चलता है कि यह परिसर 18 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें एक बड़ी मस्जिद, 600 से अधिक छात्रों के लिए एक मदरसा, एक स्विमिंग पूल, घोड़ों के लिए अस्तबल और एक व्यायामशाला शामिल है. 

जैश-ए-मोहम्मद का इतिहास 

24 दिसंबर 1999 को हरकत-उल-मुजाहिद्दीन के पांच आतंकवादियों ने 190 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को ले जा रहे इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण कर लिया था. इस विमान को काठमांडू से दिल्ली लाया जा रहा था, लेकिन इसे अमृतसर, लाहौर, दुबई होते हुए कंधार (तालिबान के कब्जे वाला अफगानिस्तान) ले जाया गया. भारत को तीन आतंकवादियों, मसूद अजहर, उमर शेख और मुश्ताक जरगर को रिहा करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

मसूद अज़हर कौन है? 

1968 में जन्मे मसूद अजहर को 1994 में भारत में गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी से पहले वह अफगानिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन (एचयूएम) का सदस्य और मौलवी था. रिहाई के बाद मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) की स्थापना की. यह संगठन देवबंदी धर्म की कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा से प्रेरित है. वर्ष 2000 के बाद, अन्य सक्रिय आतंकवादी संगठनों के साथ मिलकर जैश-ए-मोहम्मद ने भारत में कई हमले किये, जिनमें जम्मू-कश्मीर विधानसभा और भारतीय संसद पर हमले भी शामिल हैं. 

कब हुई थी जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना

जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना 31 जनवरी 2000 को कराची में हुई थी. अपनी आतंकवादी गतिविधियां शुरू करने से पहले, अजहर अफगानिस्तान गया था, जहां उसकी मुलाकात पूर्व अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन से हुई थी.

इस संगठन को आईएसआई से न केवल बुनियादी ढांचे में सहायता मिली, बल्कि वित्त पोषण और विदेशी दौरों में भी सहायता मिली. जैश-ए-मोहम्मद के पहले कुछ सदस्य हरकत-उल-मुजाहिदीन से आये थे. बहावलपुर स्थित मुख्यालय का उपयोग मुख्य रूप से भर्ती, धन जुटाने और ब्रेनवॉशिंग के लिए किया जाता है, जबकि आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर खैबर पख्तूनख्वा और पीओके में स्थित हैं. 

'जेईएस-ए-मोहम्मद' द्वारा भारत के विरुद्ध किए गए अत्याचार

  1. अप्रैल 2000: श्रीनगर के बादामी बाग में पहला आत्मघाती हमला, चार जवान शहीद 
  2. अक्टूबर 2001: जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हमला, 30 से अधिक लोग मारे गए 
  3. दिसंबर 2001: संसद पर हमला, 14 लोग मारे गए  
  4. जनवरी 2016: पठानकोट एयरबेस हमला, 3 सुरक्षाकर्मी शहीद 
  5. सितंबर 2016: उरी हमला, 19 भारतीय जवान शहीद 
  6. फरवरी 2019: पुलवामा हमला, 40 सीआरपीएफ जवान शहीद
  7. 22 अप्रैल, 2025: जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा संगठन पहलगाम आतंकी हमला

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