भारत
पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिज की पत्नी लैला कबीर का निधन हो गया है. जॉर्ज फर्नांडिज़ का साल 2019 में निधन हो गया था.
अटल बिहार वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रहे जॉर्ज फर्नांडिज़ की पत्नी लैला कबीर का निधन हो गया. लैला कबीर लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं. वह 88 साल की थीं. करीब दो साल पहले लैला कबीर को इंटेस्टाइन कैंसर होने का पता चला था. उनका इलाज चला और उनकी सेहत सुधर रही थी. हालांकि, कुछ वक्त से उनकी तबीयत नासाज़ रहने लगी थी. 15 मई को उनका निधन हो गया.
लैला कबीर के पिता हुमायूं कबीर नेहरू सरकार में शिक्षा मंत्री थे. वहीं, पूर्व CJI अल्तमस कबीर उनके चचेरे भाई थे. लैला कबीर की मां शांति देवी सामाजिक कार्यकर्ता थीं, उन्होंने कई स्वयंसेवी संगठनों की शुरुआत की थी. लैला एक संपन्न परिवार में जन्मी थीं, उन्होंने ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी. पढ़ाई के बाद भारत लौटीं तो उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर काम करना शुरू किया.
लैला कबीर और जॉर्ज फर्नांडिज़ की प्रेम कहानी आम कहानी नहीं है. प्यार के बाद शादी, शादी के बाद मतभेद और मतभेद के बाद अलगाव तो है. लेकिन अलगाव के बाद फिर से समर्पण भी है. लैला और जॉर्ज की मुलाकात 1971 में हुई थी. लैला तब रेड क्रॉस में असिस्टेंट डायरेक्टर थीं. कोलकाता एयरपोर्ट फर्नांडिज़ दिल्ली जाने वाली फ्लाइट का इंतज़ार कर रहे थे. तब वो सांसद बन चुके थे. वहीं, लैला कबीर भी दिल्ली लौट रही थीं. फ्लाइट के इंतजार के बीच दोनों के बीच फॉर्मल हेलो-हाय हुई. लेकिन फ्लाइट में दोनों को साथ की सीट मिल गई, बातें करते हुए दोनों दिल्ली से कोलकाता पहुंचे. इसके बाद दोनों के बीच बात-मुलाकात जारी रही. पहली मुलाकात के महज़ तीन महीने बाद 22 जुलाई, 1971 को दोनों ने शादी कर ली थी.
शादी के तीन साल बाद 1974 में लैला और जॉर्ज के घर बेटे शॉन का जन्म हुआ. 1975 में जब आपातकाल घोषित हुआ तो फर्नांडिज़ अंडरग्राउंड हो गए और लैला बेटे को लेकर यूएस चली गईं. लैला को फिक्र थी कि जॉर्ज की हत्या न करवा दी जाए, वो लगातार एमरजेंसी के खिलाफ लॉबी कर रही थीं. साल 1977 में जॉर्ज फर्नांडिज़ ने जेल से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. जनता दल की सरकार में उन्हें इंडस्ट्री मिनिस्ट्री दी गई. साथ रहते हुए दोनों के बीच मतभेद साल 1984 में लीला ने जॉर्ज से अलग होने का फैसला किया. दोनों लगभग 25 साल अलग रहे लेकिन तलाक नहीं लिया.
अलग रहते हुए भी लीला ने बिहार में जॉर्ज के लिए चुनाव प्रचार किया. दोनों ने कभी भी एक-दूसरे के बारे में गलत बात नहीं की. साल 2009 में जब शॉन अपने पिता के साथ समय बिताने दिल्ली आए तो उन्हें अहसास हुआ कि जॉर्ज अपनी याददाश्त खोने लगे हैं. तब लीला ने फिर से उनके साथ रहने का फैसला किया. वो उनके साथ उनके सरकारी आवास में रहने लगीं और उनकी आखिरी सांस तक उनका ख्याल रखा. साल 2019 में जॉर्ज फर्नांडिज़ का निधन हो गया था.
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