Advertisement

कौन है Madam N जिसके रडार पर हैं भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स? क्यों उसके मंसूबे हैं बेहद खतरनाक

भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की गिरफ़्तारी के बाद हुई जांच में मैडम एन नाम की एक महिला का नाम सामने आया है. महिला के विषय में बताया जा रहा है की वो लाहौर में 'ट्रैवल एजेंसी' चलाती है और उसने भारतीय सोशल मीडिया इंफ्ल्युएंसर्स को अपने देश की यात्रा करने में मदद की.

Latest News
कौन है Madam N जिसके रडार पर हैं भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स? क्यों उसके मंसूबे हैं बेहद खतरनाक
Add DNA as a Preferred Source

पाकिस्तान के लाहौर में 'ट्रैवल एजेंसी' चलाने वाली एक महिला की पहचान उस व्यक्ति के रूप में हुई है, जिसने भारतीय सोशल मीडिया इंफ्ल्युएंसर्स को अपने देश की यात्रा करने में मदद की और उन्हें जासूस के रूप में इस्तेमाल करने के लिए आधार तैयार किया. ज्ञात हो कि पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के तहत काम करने वाली व्यवसायी नोशाबा शहजाद, जो लाहौर स्थित कंपनी 'जयाना ट्रैवल एंड टूरिज्म' चलाती है, ने ज्योति मल्होत्रा ​​जैसे भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, जिन्हें हाल ही में गिरफ्तार किया गया था और कई अन्य लोगों को पाकिस्तान आने में मदद की.

आईएसआई द्वारा 'मैडम एन' कोडनेम से जानी जाने वाली शहजाद का नाम उस वक़्त सामने आया जब भारत में गिरफ्तार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से पूछताछ हुई. बताया जा रहा है कि मैडम एन कम से कम 500 जासूसों का एक विशाल स्लीपर सेल नेटवर्क स्थापित करने के लिए काम कर रही थीं, जो पूरे भारत में खुलेआम छिप सकते हैं.

ध्यान रहे कि शहजाद के विषय में जो जानकारी आई है वो चौंकाने वाली है. बताया जा रहा है कि शहज़ाद के पति पाकिस्तानी सिविल सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. इसके अलावा पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने उन्हें भारत में स्लीपर सेल नेटवर्क स्थापित करने के निर्देश भेजे थे.

कहा ये भी जा रहा है कि नोशाबा शहजाद ने भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पहले अपने देश की सेना फिर आईएसआई से मिलवाया. इसके अलावा शहज़ाद के विषय में कहा ये भी जा रहा है कि वो भारतीय हिंदुओं और सिखों को लुभाने के लिए अलग अलग हथकंडे अपनाती थी.

माना जा रहा है कि मैडम एन नाम से मशहूर इस महिला ने पिछले छह महीनों में भारत के लगभग 3,000 नागरिकों और 1,500 अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को पाकिस्तान आने में मदद की.

शहजाद का लेकर कहा तो यहां तक जा रहा है कि उसका प्रभाव दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास के वीजा विभाग तक था. वह प्रथम सचिव (वीजा) सुहैल कमर और काउंसलर (व्यापार) उमर शेरयार के संपर्क में थी, जिसका मतलब था कि वह जिसे चाहती थी उसे 'एक फोन कॉल' से तुरंत पाकिस्तानी वीजा मिल जाता था.

वह आईएसआई के ऑपरेटिव दानिश उर्फ ​​एहसान-उर-रहमान के संपर्क में भी थी, जो दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास में वीजा अधिकारी के तौर पर काम करता था. ज्योति मल्होत्रा ​​के उजागर होने के बाद दानिश को मई में भारत से निकाल दिया गया था.

जबकि भारत से पर्यटकों को पाकिस्तान भेजने की न तो कोई व्यवस्था है और न ही भारतीय नागरिकों को पर्यटक वीजा जारी करने की कोई प्रक्रिया है, पाकिस्तानी उच्चायोग 'मैडम एन' की सिफारिश और प्रायोजन पर आगंतुक वीजा जारी कर रहा था.

पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के साथ उसके संबंध को इस तथ्य से भी समझा जा सकता है कि उसकी कंपनी पाकिस्तान में सिख और हिंदू तीर्थयात्रा आयोजित करने वाली एकमात्र एजेंसी है, जो इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के साथ मिलकर काम करती है.

सूत्रों ने बताया कि शहजाद ने भारतीय तीर्थयात्रियों से भारी मात्रा में पैसे लिए और इस पैसे का इस्तेमाल पाकिस्तानी प्रचार के लिए किया. हाल ही में उसने दिल्ली और दूसरे शहरों में कुछ ट्रैवल एजेंट नियुक्त किए हैं, जो अब सोशल मीडिया पर उसकी कंपनी का प्रचार कर रहे हैं.

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement