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Wrestlers Protest: कुश्ती संघ के असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर ने बृजभूषण सिंह के पक्ष में बयान दिया था. जिसके बाद खेल मंत्रालय ने कार्रवाई की है.
डीएनए हिंदी: दिल्ली में पहलवानों के धरने और यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है. मंत्रालय ने कुश्ती संघ के असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर (Vinod Tomar) को सस्पेंड कर दिया है. इस विवाद के दौरान विनोद तोमर ने WFI के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के पक्ष में बयान दिया था. तोमर ने कहा था कि फेडरेशन के ज्यादातर लोग बृजभूषण के साथ हैं, व्यक्तिगत तौर मुझे पहलवानों के आरोप सही नहीं लगते.
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए विनोद तोमर ने कहा था कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठे पहलवानों ने WFI के अध्यक्ष बृजभूषण के खिलाफ यौन उत्डीड़न और वित्तीय गड़बड़ी के कोई भी सबूत पेश नहीं किए. उन्होंने कहा कि मैं पिछले 12 सालों से बृजभूषण के साथ जुड़ा हुआ हूं लेकिन मैंने कभी ऐसी घटना का आरोप उनके ऊपर लगता नहीं देखा.
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WFI ने खेल मंत्रालय को सौंपा अपना जवाब
वहीं, इस मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने खेल मंत्रालय को अपना जवाब भी सौंपा है. डब्ल्यूएफआई ने बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न सहित सभी आरोपों को खारिज करते हुए बेबुनियाद बताया है. WFI ने कहा है कि खेल निकाय में तानाशाही और कुप्रबंधन की कोई गुंजाइश नहीं है. देश के शीर्ष पहलवानों के धरने पर बैठने के बाद खेल मंत्रालय ने डब्ल्यूएफआई से स्पष्टीकरण मांगा था. पहलवानों ने आरोप लगाया था कि महासंघ प्रमुख ने महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न किया और तानाशाह की तरह काम किया.
Ministry of Sports suspends Vinod Tomar, Assistant Secretary of the Wrestling Federation of India (WFI)
(File pic) pic.twitter.com/SnM7Ltn6VS— ANI (@ANI) January 21, 2023
खेल मंत्रालय ने शुक्रवार को डब्ल्यूएफआई से जवाब मांगा था और इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की थी. इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर से पहलवानों ने अपना विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया था. बृजभूषण सिंह ने कहा कि जांच पूरी होने तक वह डब्ल्यूएफआई प्रमुख के पद से हट जायेंगे. डब्ल्यूएफआई ने खेल मंत्रालय को अपने जवाब में कहा, ‘डब्ल्यूएफआई का प्रबंधन उसके संविधान के अनुसार एक निर्वाचित निकाय द्वारा किया जाता है, ऐसे में डब्ल्यूएफआई में अध्यक्ष सहित किसी एक द्वारा व्यक्तिगत रूप से मनमानी और कुप्रबंधन की कोई गुंजाइश नहीं है.’
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