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अमेठी में अस्पताल पर सियासी रार, अपनी ही सरकार पर बरसे वरुण गांधी

वरुण गांधी ने अमेठी के संजय गांधी अस्पताल के खिलाफ एक्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी सरकार की आलोचना की है. जानिए ताजा विवाद की वजह.

अमेठी में अस्पताल पर सियासी रार, अपनी ही सरकार पर बरसे वरुण गांधी

BJP सांसद वरुण गांधी.

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डीएनए हिंदी: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से लोक सभा सांसद वरुण गांधी ने एक बार फिर से अमेठी के संजय गांधी अस्पताल का मुद्दा उठाते हुए भाजपा सरकार पर 'व्यवस्था का अहंकार ' दिखाने का आरोप लगाया है. वरुण गांधी ने इशारों-इशारों में बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि कहीं 'नाम' के प्रति नाराजगी लाखों का 'काम' न बिगाड़ दे.

वरुण गांधी ने एक वीडियो शेयर करते हुए एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'सवाल संजय गांधी अस्पताल के 450 कर्मचारियों और उनके परिवार का ही नहीं, रोज सैकड़ों की संख्या में इलाज कराने वाले सूबे की आम जनता का भी है. उनकी पीड़ा के साथ न्याय 'मानवता की दृष्टि' ही कर सकती है, 'व्यवस्था का अहंकार' नहीं. कहीं 'नाम' के प्रति नाराजगी लाखों का 'काम' न बिगाड़ दे.'

वरुण गांधी ने व्यापक और निष्पक्ष जांच के बिना अमेठी के संजय गांधी अस्पताल का परिचालन लाइसेंस निलंबित करने पर गहरी नाराजगी जताते हुए 22 सितंबर को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को पत्र भी लिखा था. 

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वरुण गांधी ने लिखा, 'सवाल संजय गांधी अस्पताल के 450 कर्मचारियों और उनके परिवार का ही नहीं, रोज सैकड़ों की संख्या में इलाज कराने वाले सूबे की आम जनता का भी है. उनकी पीड़ा के साथ न्याय ‘मानवता की दृष्टि’ ही कर सकती है, ‘व्यवस्था का अहंकार’ नहीं. कहीं ‘नाम’ के प्रति नाराजगी लाखों का ‘काम’ न बिगाड़ दे.'

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सरकार के फैसले पर जमकर बरसे वरुण गांधी
वरुण ने पाठक को लिखे उस पत्र में भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए लिखा था कि स्पष्टीकरण का कोई अवसर दिए बिना अस्पताल के लाइसेंस को एकतरफा तौर निलंबित करना चिंता पैदा करता है, क्योंकि यह निर्णय स्वास्थ्य देखभाल पहुंच, आजीविका और शैक्षिक निरंतरता को प्रभावित करता है. 

वरुण गांधी ने लिखा था, 'चिकित्सीय लापरवाही से जुड़ी हालिया घटना की गंभीरता को स्वीकार करते हुए इस मामले को आनुपातिकता और निष्पक्षता की भावना से देखना आवश्यक है. स्वामित्व जैसे मुद्दे की अनदेखी के साथ किसी भी स्वास्थ्य सुविधा में दुखद घटनाएं सामने आ सकती हैं. व्यापक और निष्पक्ष जांच की अनुमति दिए बिना पूरे अस्पताल का लाइसेंस निलंबित करना जल्दबाजी और अन्यायपूर्ण कार्रवाई प्रतीत होती है.' (इनपुट: IANS)

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