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उत्तराखंड के गौरीकुंड जंगल में रविवार को हुआ हेलीकॉप्टर हादसा पिछले छह हफ़्तों में राज्य में हुआ पांचवां ऐसा हादसा था. आइये नजर डालें उन कारणों पर जो बताएंगे कि उत्तराखंड में बार बार हेलीकॉप्टर दुर्घटना क्यों हो रही है.
उत्तराखंड के गौरीकुंड जंगल में जो हुआ उसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है. यहां घटित दुर्घटना में हेलीकॉप्टर में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई, जिसने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं. यह घटना, छह सप्ताह में पांचवीं ऐसी हेलिकॉप्टर दुर्घटना है, जो इस वर्ष चार धाम तीर्थयात्रा के मौसम में उत्तराखंड में न केवल घटित हुई बल्कि एक आपदा में परिवर्तत हुई.
बताते चलें कि आर्यन एविएशन के हेलीकॉप्टर ने केदारनाथ से यात्रियों को लेने के बाद सुबह 5.17 बजे गुप्तकाशी के लिए उड़ान भरी थी. कथित तौर पर घाटी में खराब मौसम की वजह से यह रास्ता भटक गया.अधिकारियों ने पुष्टि की है कि खराब दृश्यता और खराब मौसम की वजह से दुर्घटना हुई.
पिछली हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं के कुछ कारण
खराब मौसम - खराब मौसम की स्थिति, जैसे खराब दृश्यता, दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ा सकती है. 31 अगस्त, 2024 को हुई एक पिछली घटना में, भारतीय वायु सेना के MI-17 हेलिकॉप्टर द्वारा एयरलिफ्ट किया जा रहा एक क्षतिग्रस्त हेलीकॉप्टर हवा और वजन के कारण संतुलन खोने के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.
तकनीकी मुद्दे - यांत्रिक विफलताएं या तकनीकी खामियां भी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं. 31 अगस्त की घटना में शामिल हेलीकॉप्टर में पहले भी तकनीकी समस्याएं आई थीं, जिसमें पिछले साल 24 मई को केदारनाथ के पास आपातकालीन लैंडिंग भी शामिल थी.
सुरक्षा प्रोटोकॉल - सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है. हेलीकॉप्टर कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण सुरक्षा पर मुनाफ़े को प्राथमिकता दी जा सकती है, जिससे यात्रियों की सेहत से समझौता हो सकता है.
विनियामक निरीक्षण
नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) और उत्तराखंड नागरिक विमानन विकास प्राधिकरण (UCADA) इस क्षेत्र में हेलीकॉप्टर संचालन के विनियमन और देखरेख के लिए जिम्मेदार हैं.
गौरीकुंड दुर्घटना के बाद, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच के आदेश दिए और रुद्रप्रयाग के जिला मजिस्ट्रेट ने भी मजिस्ट्रेट जांच शुरू की.