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Urea Scam: किसानों के लिए आने वाले सब्सिडी वाले यूरिया को गलत तरीके से प्लाईवुड फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जा रहा है, देशभर की कई नामचीन प्लाईवुड कंपनियां इससे बड़ा मुनाफा कमा रही हैं. ZEE NEWS ने हाल ही में इसको लेकर बड़ा खुलासा किया है..
Fertilizer Scam - Urea Scam India: एक किसान के लिए खाद की एक बोरी सोना होता है, जिसे खरीदने के लिए किसानों को कई दिनों का इंतजार करना पड़ता है और घंटों लाइन में लगना पड़ता है. इस खाद की असली कीमत ज्यादा है. किसानों तक खाद सस्ते में पहुंचाने के लिए सरकार इस खाद पर भारी सब्सिडी देती है. लेकिन, किसानों की इसी सस्ते यूरिया पर प्लाईवुड बनाने वाली नामचीन कंपनियों की नजर पड़ गई है. किसानों के लिए आने वाले यूरिया खाद को रात के समय ट्रकों में भरकर खेतों के बजाय गलत तरीके से प्लाईवुड फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जा रहा है. जो खाद किसानों और उनकी फसलों के लिए जरूरी है, वह अब दूसरे कामों में इस्तेमाल हो रही हैं. ZEE NEWS ने इसको लेकर बड़ा खुलासा किया है.
दरअसल MDF और बोर्ड बनाने में यूरिया का इस्तेमाल होता है, प्लाईवुड बनाने वाली कंपनियां यूरिया का धड़ल्ले से इस्तेमाल करती हैं. किसानों की मिलने वाली सस्ती यूरिया को चोरी कर प्लाईवुड कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ा रही हैं. भारत सरकार हर साल करीब ₹2 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी देती है ताकि किसानों को ताकि उन्हें बेहद कीमत पर खाद मिल सके. एक बोरी यूरिया, की असली कीमत लगभग ₹3800 रुपये होती है और सब्सिडी के कारण किसान को यह सिर्फ ₹266 रुपये में मिलती है.
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सब्सिडी वाली यूरिया की कीमत करीब ₹6/kg है, जबकि इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली Technical Grade यानि कॉमर्शियल यूरिया ₹80/kg तक जाती है. इसी भारी अंतर के कारण चोरों की नजर किसानों वाले यूरिया पर होती है. बता दें कि कॉमर्शियल यूरिया को हमेशा सफेद पैकेट में बेचा जाता है जबकि किसानों का यूरिया पीले पैकेट में बेचा जाता है.
यूरिया चोरी की जड़ तक पहुंचने के लिए ज़ी मीडिय़ा स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम के सदस्य ने पहचान छिपाई और खरीदार बनकर बाजार में उतरे, हरियाणा का यमुनानगर जिला इस ऑपरेशन का पहला ठिकाना था, जिसे देश का Plywood Hub कहा जाता है. यहीं से लूट की परतें खुलनी शुरू हुईं. ग्लू बनाने वाली एक फैक्ट्री में बातचीत के दौरान करोड़ों का खेल सामने आ गया.
इस तरह की गड़बड़ी की वजह से सरकार को हर साल हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. इससे किसानों को समय पर खाद नहीं मिलती, जिसका सीधा असर खेती पर पड़ता है. इससे उत्पादन भी कम हो सकता है. फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है और इसको लेकर कई बड़े खुलासे सामने आ रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द ही इस पूरे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई होगी, किसानों को सही समय पर खाद मिलेगी और इस तरह की गड़बड़ी पर रोक लग सकेगी.
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