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Uranium in Delhi Groundwater: दिल्लीवासी प्रदूषण की मार झेल रहे हैं. CPCB के आंकड़ों के अनुसार, आज सुबह 6 बजे तक अधिकांश इलाकों का AQI 300 के पार कर गया, जिससे समग्र वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच गई. दिल्ली में हवा के साथ अब पानी की भी गुणवत्ता बिगड़ती नजर आ रही है...
Uranium Found in Delhi Groundwater: दिल्लीवासी प्रदूषण की मार झेल रहे हैं. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, आज यानी 02 दिसंबर 2025 की सुबह 6 बजे तक अधिकांश इलाकों का AQI 300 के पार कर गया, जिससे समग्र वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच गई. दिल्ली में हवा के साथ अब पानी की भी गुणवत्ता बिगड़ती नजर आ रही है. दरअसल हाल ही में CPCB की नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें में भूजल में यूरेनियम और अन्य खतरनाक मेटल्स मिलने की जानकारी दी गई है, जो मानक के अनुसार नहीं है. प्रदूषण से दिल्ली में रहने वाले लोग पहले ही बेहाल हैं, अब भूजल में सामान्य से अधिक यूरेनियम का स्तर एक और परेशानी खड़ी करा रहा है..
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के भूजल में कुछ खतरनाक मेटल्स जैसे यूरेनियम, सीसा, नाइट्रेट और फ्लोराइड का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली यूरेनियम की ज्यादा मात्रा के मामले में पूरे देश में तीसरे नंबर पर है, यह स्थिति लोगों की हेल्थ के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. 2020 में की गई एक जांच में पाया गया था कि 11.7% नमूनों में यूरेनियम सुरक्षित सीमा से ज़्यादा था, उसी दौरान उत्तर-पश्चिम जिले के एक ट्यूबवेल में 89.4 ppb की बहुत ऊंची मात्रा दर्ज हुई थी.
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वहीं 2024 तक आते-आते, दिल्ली के छह जिले, जिसमें उत्तर, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम शामिल है, में भूजल में यूरेनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक मिली और पूरे शहर में ऐसे नमूनों की हिस्सेदारी 10.7% रही. रिपोर्ट की मानें तो दिल्ली के भूजल में यूरेनियम प्रदूषण धीरे-धीरे बढ़ रहा है.
पीने के पानी में लंबे समय तक यूरेनियम, आर्सेनिक और सीसा मौजूद रहने की वजह से किडनी से जुड़ी बीमारियां, तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को नुकसान, हड्डियों में विकृति और कैंसर आदि को जोखिम बढ़ सकता है. इसके अलावा पानी में लोहा (iron) और मैंगनीज की अधिक मात्रा छोटे बच्चों और शिशुओं के लिए अलग से खतरा पैदा करती है.
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इसकी वजह से सबसे आम और गंभीर प्रभाव किडनी पर पड़ता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह किडनी की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और उनके फ़िल्टर करने की क्षमता कम कर सकता है. लंबे समय तक संपर्क में रहने से किडनी की पुरानी बीमारी (chronic kidney disease) का जोखिम भी बढ़ता है. इतना ही नहीं, समय के साथ यह हड्डियों को कमजोर कर सकता है. याददाश्त, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, व्यवहार, तंत्रिका तंत्र का सामान्य कामकाज में परेशानी पैदा कर सकता है.
इसके अलावा लंबे समय तक सेवन करने पर कुछ प्रकार के कैंसर का थोड़ा बढ़ा हुआ जोखिम हो सकता है, वहीं बच्चों में विकास से जुड़ी समस्याएं और पाचन तंत्र और सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं जैसे मितली, उल्टी और पेट में जलन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर और एक्सपर्ट की सलाह लें.
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