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बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट के विरोध में आए अखिलेश यादव, भाजपा ने उठाए पूर्व सीएम की नीयत पर सवाल 

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने मंदिरों के प्रबंधन को लेकर भाजपा पर बड़ा आरोप लगाया है. अखिलेश ने कहा है कि कई बड़े मंदिरों पर सरकार के नाम पर बीजेपी और उसके सहयोगी अप्रत्यक्ष रूप से अपना कब्जा जमा रहे हैं. अखिलेश के इस बयान पर भाजपा ने पलटवार किया है.

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बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट के विरोध में आए अखिलेश यादव, भाजपा ने उठाए पूर्व सीएम की नीयत पर सवाल 
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पूर्व में ऐसे तमाम मौके आए जब बीजेपी यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव को हिंदू विरोधी बताकर उनके ऊपर हमलावर हुई है. बीजेपी के अखिलेश यादव पर लगाए गए आरोप सही हैं या गलत? इसपर चर्चा तब और जरूरी हो जाती है जब हम उस विरोध को देखते हैं जो अखिलेश ने नए गठित हुए बांके बिहारी ट्रस्ट का किया है. दरअसल सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने मंदिरों के प्रबंधन को लेकर भाजपा पर बड़ा आरोप लगाया है.

माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अखिलेश ने कहा है कि कई बड़े मंदिरों पर सरकार के नाम पर बीजेपी और उसके सहयोगी अप्रत्यक्ष रूप से अपना कब्जा जमा रहे हैं. वे परंपरागत और आस्थावान प्रबंधन को हटाकर बाहरी प्रशासनिक अधिकारियों को मंदिरों में बैठा रहे हैं. 

अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि जो लोग सदियों से अपने सेवा-भाव और आस्था के साथ मंदिरों का प्रबंधन करते आए हैं, उनसे उनके अधिकार छीन लिए जा रहे हैं. साथ ही उन पर अविश्वास जताकर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि वे प्रबंधन के काम में असक्षम हैं.

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक मंदिरों में श्रद्धालुओं के दान-पुण्य का उपयोग दर्शन, प्रसाद, सुरक्षा, जन सुविधा और धर्मशाला जैसे धर्मार्थ कार्यों में होता है. यह सब आस्थावान प्रबंधन ही सुनिश्चित करता है क्योंकि उनका मंदिर से गहरा लगाव होता है.

अखिलेश ने यह भी कहा कि बीजेपी के शासन में एक के बाद एक मंदिरों पर प्रशासनिक कब्जा बढ़ा है, जो देश की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के खिलाफ है. उनका मानना है कि जो लोग शासन के कृपापात्र होते हैं, वे सच्चे न्यासियों जैसे ईश्वर के कृपापात्र नहीं हो सकते. अत में पूर्व सीएम ने कहा कि आस्थावान कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, यूपी की गवर्नर आनंदीबेन पटेल ने  26 मई को श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास 2025 अध्यादेश को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है. इस अधिसूचना के साथ मंदिर न्यास ट्रस्ट का नया ढांचा भी स्पष्ट किया गया है.

राज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास ट्रस्ट में कुल 18 सदस्य होंगे. इसमें प्रशासनिक और धार्मिक दोनों पक्षों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बताते चलें कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि मंदिर के सुचारू प्रबंधन एवं संचालन में पारदर्शिता और संतुलन बना रहे.

चूंकि अखिलेश ने  श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास ट्रस्ट को एक बड़े मुद्दे की तरह पेश किया है. भाजपा ने इसपर तीखी प्रतिक्रया दी है. अखिलेश के प्रश्नों पर पलटवार करते हुए यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा अखिलेश यादव को मंदिरों से जुड़े मुद्दों पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. मंदिर तीर्थ स्थलों का हिस्सा हैं और तीर्थ स्थलों का विकास हमारी सरकार की प्राथमिकता है. 

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