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गुड न्यूज! अफ्रीका से फिर भारत आ रहे 12 और चीते, तारीख हुई तय, सरकार ने बताया पूरा प्लान

Cheetah in India: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से पिछले साल 8 चीतों को लाना महज एक ट्रेलर था, अभी 12-14 चीते और भारत लाए जाएंगे.

गुड न्यूज! अफ्रीका से फिर भारत आ रहे 12 और चीते, तारीख हुई तय, सरकार ने बताया पूरा प्लान

कूनो नेशनल पार्क में चीता

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डीएनए हिंदी: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  नामीबिया से आए 8 चीतों को बाड़े में छोड़ा था. तब देशभर ने इन विदेशी चीतों (Cheetah) का जोरदार स्वागत किया था. एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को भारत लाने की तैयारी हो गई है. सरकार ने इसकी तारीख भी तय कर दी है. मध्य प्रदेश सरकार ने यह जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर है. जिसके मुताबिक, 26 जनवरी को कूनो नेशनल पार्क में 12 और चीते छोड़े जाएंगे.

जानकारी के मुताबिक, भारत आ रहे इन चीतों को अफ्रीका में पहले से ही क्वारंटाइन में रखा गया है. इनमें 7 नर और 5 मादा हैं. 25 जनवरी को इन चीतों को दिल्ली से ग्वालियर लाया जाएगा. इसके बाद हेलीकॉप्टर में इन्हें कूनो नेशनल पार्क ले जाया जाएगा. राज्यसभा में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भी शीतकालीन सत्र के दौरान कहा था कि नामीबिया और अन्य अफ्रीकी देशों से लगभग 12 से 14 चीतों को भारत लाया जाएगा.

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कूनो पार्क में नए मेहमानों के लिए पूरी तैयारी
इन चीतों को लाने के लिए केंद्रीय वन महानिदेशक चंद्रप्रकाश गोयल और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के सदस्य सचिव एसपी यादव समेत वन मंत्रालय के करीब 20 अधिकारी 21 जनवरी को दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना होंगे. इन नए चीतों के लिए कूनो नेशनल पार्क में पूरी तैयारी कर ली गई है. मध्य प्रदेश के वन मंत्री ने हाल ही में कूनो पार्क का दौरा भी किया था और तैयारियों का जायजा लिया था.

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1952 में विलुप्त हो गए थे चीते
20वीं शताब्दी की शुरुआत से भारतीय चीतों की आबादी में तेजी से गिरावट आई और देश में चीतों की संख्या महज सैकड़ों में रह गई. साल 1918 से साल 1945 के बीच करीब 200 चीते आयात भी किए गए. 1940 के दशक में चीतों की संख्या बेहद कम हो गई और इसके साथ इनके शिकार का चलन भी कम होने लगा. कहा जाता है कि साल 1947 में कोरिया के राजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने देश के आखिरी तीन चीतों का शिकार कर उन्हें मार दिया. इसके बाद कई सालों तक चीते दिखाई न देने के बाद साल 1952 में भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से चीतों को भारत में विलुप्त घोषित कर दिया.

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