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भारत का कहना है कि मई माह में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ हुए सीजफायर के लिए अमेरिका से हुई बातचीत में टैरिफ के मुद्दे को लेकर कोई बात ही नहीं हुई है. अमेरिका ने इस मुद्दे पर तमाम बातें की हैं जिसपर भारत ने उसे मुंहतोड़ जवाब दिया है.
भारत पाकिस्तान गतिरोध पर अमेरिकी हस्तक्षेप बीते कुछ वक़्त चर्चा का विषय बना है. ऐसे में भारत की तरफ से एक बड़ा बयान आया है. भारत का कहना है कि मई माह में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ हुए सीजफायर के लिए अमेरिका से हुई बातचीत में टैरिफ के मुद्दे को लेकर कोई बात ही नहीं हुई है.
ध्यान रहे विदेश मंत्रालय की ओर से यह बयान एक ऐसे समय में सामने आया है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट को बताया कि टैरिफ की धमकी ने अमेरिका को भारत और पाकिस्तान के बीच तीन दिनों की लड़ाई के बाद सीजफायर कराने में सहायता की.
चूंकि ट्रंप प्रशासन के इस दावे ने सियासी सरगर्मियां तेज कर दी हैं इसलिए इस दावे को खारिज करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पत्रकारों से कहा है कि, 'इस विशेष मुद्दे पर भारत का विरोध साफ है... 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से लेकर 10 मई को समाप्त होने तक भारत और अमेरिका के बीच बातचीत होती रही. चर्चा के दौरान टैरिफ का मुद्दा कभी नहीं उठा.'
बताते चलें कि न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में दुनिया के लगभग सभी मुल्कों पर ट्रंप प्रशासन की तरफ से रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए जाने का मामला चल रहा है. इसी पर कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है और ट्रंप प्रशासन के लिबरेशन डे टैरिफ को अवैध बताते हुए उस पर रोक लगा दी थी.
इस दौरान कोर्ट में ट्रंप के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने सरकार का पक्ष रखते हुए टैरिफ का समर्थन किया और कहा कि टैरिफ की मदद से भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने में मदद मिली.
लटनिक के मुताबिक ट्रंप ने दोनों देशों को ट्रेड का ऑफर दिया जिससे एक पूर्ण युद्धविराम की स्थिति बनी. हालांकि, भारत ने ट्रंप प्रशासन के इस नए दावे को खारिज कर दिया है.