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Rajasthan News: 24 साल बाद आया टोंक के मालपुरा दंगे में फैसला, 8 लोगों को मिली उम्रकैद, कोर्ट बोला- जघन्य हत्याओं की माफी नहीं

Rajasthan News: राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा में 24 साल पहले सांप्रदायिक दंगा हुआ था, जिसमें दो नाबालिग समेत 6 लोगों की मौत हुई थी.

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Rajasthan News: 24 साल बाद आया टोंक के मालपुरा दंगे में फैसला, 8 लोगों को मिली उम्रकैद, कोर्ट बोला- जघन्य हत्याओं की माफी नहीं
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Rajasthan News: राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा में 24 साल पुराने सांप्रदायिक दंगे के मामले में आखिरकार फैसला आ गया है. जयपुर की स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया है, जिसमें 5 लोगों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया है, जबकि 8 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. अदालत से आरोपियों के वकीलों ने लंबा समय होने की दलील देते हुए दया की अपील की थी, लेकिन अदालत ने फैसला सुनाते हुए साफ कहा कि धारदार हथियारों से लोगों को बर्बर तरीके से काटकर मौत के घाट उतारा गया था. ऐसी जघन्य हत्याओं के मामले में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती. इस दंगे में दो नाबालिग बच्चों समेत 6 लोगों की मौत हुई थी.

क्या थी दंगे की पूरी घटना
टोंक जिले के मालपुरा में साल 2000 में दो अलग-अलग संप्रदायों के लोगों के बीच भिड़ंत हो गई थी. इस मामले में एक पक्ष के दो लोगों की मौत हुई थी, जबकि दूसरे पक्ष के चार लोग मारे गए थे. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. एक पक्ष के हरिराम की हत्या उसकी पत्नी धन्नी देवी की आंखों के सामने उस समय धारदार हथियारों से काटकर कर दी गई थी, जब वे दोनों खेत पर जा रहे थे. इसी पक्ष के कैलाश माली की भी हत्या हुई थी, लेकिन इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह नहीं था.

हरिराम की हत्या में मिली है सजा, कैलाश के मामले में हो गए बरी
हरिराम की हत्या के मामले में अदालत ने अब्दुल रज्जाक, मोहम्मद इशाक, इस्लाम, इरशाद, साजिद अली, बिलाल अहमद, मोहम्मद हबीब और मोहम्मद जफर को उम्र कैद की सजा सुनाई है. कैलाश माली की हत्या के मामले में उसके बेटे ने एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उसने कहा था कि वह हत्या के बाद मौके पर पहुंचा है. इस हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला, इसके चलते अदालत ने पांचों आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया है.

दो मामलों में अभी फैसला आना है बाकी
इन दंगों से जुड़े दो अन्य मामलों में अभी फैसला आना बाकी है. इन दोनों मामलों में कुल 25 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से 8 को जयपुर हाई कोर्ट ने 2016 में ही बरी कर दिया था, जबकि बाकी 17 आरोपियों को लेकर सुनवाई चल रही है.

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