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तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनके बारे में जो कुछ भी होगा या कहा जाएगा, वह उसे बर्दाश्त करेंगे, लेकिन उनकी बहन रोहिणी का कोई भी अपमान करे, वह असहनीय है. तेज प्रताप ने तर्क दिया है कि रोहिणी एक प्रशंसनीय मां और बहन रही हैं.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महुआ सीट से चुनाव लड़कर हार का मुंह देखने वाले तेज प्रताप यादव, अब नेता विपक्ष के घर में चल रहे फैमिली ड्रामे में कूद पड़े हैं. बता दें कि तेजस्वी यादव की बड़ी बहन रोहिणी आचार्य द्वारा 'अपमान' और 'दुर्व्यवहार' का हवाला देते हुए अपने परिवार से नाता तोड़ने के बाद, तेज प्रताप ने खुलकर अपनी बड़ी बहन का पक्ष लिया है.
रोहिणी आचार्य के साथ जो कुछ भी हो रहा है उसपर रिएक्शन देते हुए, तेज प्रताप ने कहा है कि, 'जो कोई भी हमारी बहन का अपमान करेगा, उसे भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र का सामना करना पड़ेगा. मेरे साथ जो हुआ, मैंने उसे सहन किया. लेकिन मेरी बहन का अपमान किसी भी परिस्थिति में असहनीय है,'
तेज प्रताप यादव ने दावा किया कि 'रोहिणी दीदी' जो कुछ भी कह रही हैं, वह उनके दृष्टिकोण से बिल्कुल सही है. 'एक मां के रूप में, एक महिला के रूप में, और एक बहन के रूप में, उन्होंने जो सराहनीय कार्य किया है, वह बहुत कम बेटियां, बहनें या माताएं कर सकती हैं.
तेज प्रताप ने यह भी कहा कि हमारे लिए और सभी महिलाओं के लिए, वह गहरे सम्मान की पात्र हैं, और उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा. यह इतिहास बन जाएगा, और मेरी बहन का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा,'
बता दें कि तेज प्रताप महुआ से राजद के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं. कहा तो यहां तक जा रहा है कि आचार्य ने तेजस्वी को अपने बड़े भाई के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने के लिए मनाने की कोशिश की थी.
ध्यान रहे कि दोनों भाइयों के बीच पिछले कुछ समय से अच्छे रिश्ते नहीं रहे हैं और तेज प्रताप के अपने पिता के साथ रिश्ते भी तनावपूर्ण रहे हैं. लालू द्वारा अपने छोटे बेटे को अपना उत्तराधिकारी बनाने के फैसले को तेज प्रताप की नाराजगी की एक वजह बताया जा रहा है.
तेज प्रताप अक्सर तेजस्वी के करीबियों के खिलाफ, और कभी-कभी खुद विपक्षी नेता के खिलाफ भी सार्वजनिक बयानबाजी करते रहते हैं, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है.
आखिर चल क्या रहा है लालू परिवार में?
बता दें कि अभी बीते दिनों ही रोहिणी आचार्य ने हवाई अड्डे पर अपने अपमान के बारे में सबसे पहले बात की थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद को अपने परिवार (मायका) और राजद से अलग कर लिया है.
रोहिणी ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव के समर्थकों पर आरोप लगाया कि उन्होंने 'करोड़ों रुपये और पार्टी टिकट के बदले' अपने पिता को एक 'खराब' किडनी दान की है.
आचार्य ने 'राजनीति छोड़ने और अपने परिवार से नाता तोड़ने' की घोषणा के एक दिन बाद, एक्स पर कुछ पोस्ट में अपना गुस्सा निकाला और आरोप लगाया कि तेजस्वी, राज्यसभा सांसद संजय यादव और रमीज़, जो उनके भाई के क्रिकेट के दिनों से उनके करीबी दोस्त हैं, ने उन्हें 'घर से निकाल दिया'.
पिछले साल के आम चुनावों में सारण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने वाली आचार्य ने कहा, 'कल मुझे गालियां दी गईं और मुझ पर अपनी खराब किडनी अपने पिता को दान करने का आरोप लगाया गया, और वह भी करोड़ों रुपये और पार्टी टिकट के बदले में.'
तेजस्वी और संजय यादव पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं सभी विवाहित महिलाओं से कहूंगी कि वे अपने माता-पिता को बचाने के लिए कभी कुछ न करें, और अगर उनका कोई भाई है, तो उन्हें उससे अपनी किडनी दान करने के लिए कहना चाहिए या अपने हरियाणवी दोस्त से ऐसा करने के लिए कहना चाहिए.'
आचार्य, जो सिंगापुर में रहती हैं, जहां उनके पिता का तीन साल पहले किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था, ने कहा, 'मैंने अपने पति या ससुराल वालों की अनुमति लिए बिना या अपने तीन बच्चों के बारे में सोचे बिना अपनी किडनी दान करके पाप किया है... किसी भी बेटी का हश्र रोहिणी जैसा न हो.'
एक अन्य पोस्ट में, उन्होंने आरोप लगाया कि 'एक विवाहित महिला और एक मां' होने के बावजूद, उन्हें गालियां दी गईं और 'मुझ पर चप्पल फेंकने के लिए उठाई गई', जिसके कारण उन्हें'अपने माता-पिता और बहनों को छोड़कर, रोते हुए घर छोड़ना पड़ा'.
उन्होंने आगे कहा, 'मैं अनाथ हो गई हूं. किसी भी घर में रोहिणी जैसी बेटी और बहन पैदा न हो.'
शनिवार को, दिल्ली के लिए उड़ान भरते समय, आचार्य ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि हालात तब बिगड़ गए जब उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हाल ही में हुए चुनावों में पार्टी की हार के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए, जिसमें राजद ने 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में केवल 25 सीटें जीतीं.