भारत
भारत ने कृषि के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने दुनिया की पहली Genome-Edited चावल की 2 किस्में विकसित की हैं, जिनकी खासियत ये है कि इनकी पैदावार में लागत घटेगी, पानी और समय की भी बचत होगी...
Shivraj Singh Chouhan Launches 2 Genome Edited Rice- भारत ने कृषि के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है. दरअसल, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने जीनोम एडिटिंग (Genome-Edited) कर धान की दो नई किस्में तैयार की हैं. भारत के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को इसकी घोषणा की है. इसके साथ ही शिवराज सिंह चौहान ने युवा किसानों से अपील की कि वे आधुनिक और उन्नत खेती की तकनीक अपनाएं. बता दें कि Genome-Edited धान की इन 2 नई किस्मों की मदद से कम लागत, कम पानी और कम समय में अधिक उत्पादन करने में मदद मिलेगी.
बता दें कि इसकी पहली किस्म का नाम कमला (डीआरआर-100) है और दूसरी का नाम डीएसटी राइस-1 है. इसके साथ भारत जीनोम संपादित धान से चावल की किस्में विकसित करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है.
नई किस्मों से बढ़ेगी मुस्कान
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) May 4, 2025
समृद्ध होंगे देश के किसान
आज पूसा, नई दिल्ली में जीनोम-संपादित धान की दो किस्मों का लोकार्पण किया। pic.twitter.com/8uBGeNmiv4
शिवराज सिंह चौहान ने इस शोध को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ये किस्में राष्ट्र में दूसरी हरित क्रांति का बिगुल बजाने में अग्रणी भूमिका निभाएंगी, इन किस्मों को जल्द ही किसानों के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा.
बता दें कि चावल की इन किस्मों को सीआरआईएसपीआर-सीएएस नाम की तकनीक से तैयार किया गया है, इसके लिए पौधे के जीन में बेहद सूक्ष्म बदलाव किए जाते हैं, पर कोई बाहरी (विदेशी) जीन नहीं डाला जाता है. यह सुरक्षित तकनीक मानी जाती है और भारत में इसे खेती के लिए मंजूरी भी मिल चुकी है.
बता दें कि इस तकनीक के जरिए विकसित इन किस्मों में दो मुख्य फायदे हैं, पह पहला ये कि फसल जल्दी तैयार होती है और दूसरा कम पानी में भी अच्छी पैदावार मिलती है. ऐसे में इनकी मदद से अब किसानों को कम लागत, कम पानी और कम समय में अधिक उत्पादन करने में मदद मिलेगी.
इससे उत्पादन लागत घटेगी, किसानों की आमदनी बढ़ेगी. क्योंकि फसल जल्दी कटेगी और अगली फसल जल्दी बोई जा सकेगी, जिससे ज्यादा चक्र में खेती हो सकेगी.
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