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शरद पवार छोड़ रहे हैं कांग्रेस-उद्धव ठाकरे का साथ? जानिए क्यों उठा है ये सवाल

Sharad Pawar लगातार अन्य विपक्षी दलों से अलग तेवर दिखा रहे हैं. इससे उनके साल 2024 के चुनाव में मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन में खड़े होने पर सवालिया निशान है.

शरद पवार छोड़ रहे हैं कांग्रेस-उद्धव ठाकरे का साथ? जानिए क्यों उठा है ये सवाल

Sharad Pawar

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डीएनए हिंदी: Maha Vikas Aghadi- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ से मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष का साझा गठबंधन तैयार करने की कवायद के बीच शरद पवार के तेवर लगातार तीखे होते जा रहे हैं. एकतरफ नीतीश कुमार सोमवार को जहां ममता बनर्जी और अखिलेश यादव को एकसाथ बैठाने की कोशिश कर रहे थे, वहीं उसी समय शरद पवार महाराष्ट्र में बने-बनाए विपक्षी गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहे थे. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया शरद पवार ने साफ कहा कि साल 2024 के चुनाव में महाविकास अघाड़ी (Maha Vikas Aghadi) रहेगा या नहीं, इसे लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है. पवार से अमरावती में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछा गया कि साल 2024 में महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी मिलकर चुनाव लड़ेगा या नहीं?? पवार ने जवाब में कहा, हम महाविकास अघाड़ी के साथ काम करना चाहते हैं और आज इसका हिस्सा भी हैं, लेकिन राजनीति में हमेशा इच्छा ही पर्याप्त नहीं होती. उन्होंने कहा कि साल 2024 के चुनाव में हम महाविकास अघाड़ी में रहेंगे या नहीं, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता.

क्या है महाविकास अघाड़ी

महाविकास अघाड़ी (MVA) एनसीपी, शिवसेना (Uddhav Thackeray) और कांग्रेस का गठबंधन है. यह गठबंधन तीनों पार्टियों ने साल 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद बनाया था. यह गठबंधन भाजपा के महाराष्ट्र की सत्ता में बरकार रहने से रोकने के लिए बनाया गया था. MVA ने बाद में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार बनाई थी, जो पिछले साल एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के शिवसेना में दो फाड़कर भाजपा के साथ हाथ मिला लेने से गिर गई थी.

किन कारणों से टूट सकता है MVA

शरद पवार ने कहा कि हम MVA का हिस्सा हैं और साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी रखते हैं, लेकिन राजनीति केवल इच्छा नहीं, कई अन्य कारणों पर भी चलती है. सीट बंटवारा, आपस में किसी तरह की अन्य समस्या आदि पर चर्चा के बाद ऊंट किस करवट बैठता है. इसके बाद ही फैसला होता है. अभी इन पर चर्चा नहीं हुई है तो मैं आपको इस बारे में कैसे कह दूं.

क्या NDA के साथ जा सकते हैं पवार?

शरद पवार लगातार विपक्षी नेताओं से अलग ऐसे बयान दे रहे हैं, जो भाजपा नेतृत्व वाले NDA के फेवर में लगते हैं. पूरा विपक्ष जब अडानी ग्रुप के खिलाफ जेपीसी जांच की मांग कर रहा था, तब पवार ने इस मांग को खारिज कर दिया था. इसके बाद भी वह कई मौकों पर विपक्ष से अलग सुर में दिखाई दिए हैं. अब भी उनका MVA के खिलाफ बयान ऐसे समय पर आया है, जब उनके भतीजे अजित पवार के भाजपा के साथ जाने की अफवाह जोरशोर से फैली हुई है. ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि क्या पवार भी NDA के साथ जा सकते हैं. हालांकि पवार की राजनीति हमेशा भाजपा विरोध की ही रही है. ऐसे में ये संभावना कम ही दिखाई दे रही है. लेकिन यह भी उदाहरण है कि एकसमय पवार शिवसेना के भी धुरविरोधी थे और आज उसी के साथ गठबंधन में हैं.

क्यों अहम है इस समय पवार का यह बयान

पवार का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब महाराष्ट्र में एक बार फिर सत्ता संकट पैदा होता दिख रहा है. दरअसल शिवसेना (शिंदे गुट) के भविष्य का फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है. यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उसके खिलाफ आया तो शिंदु गुट और भाजपा की साझा सरकार खतरे में पड़ जाएगी. 288 सीट वाली विधानसभा के मौजूदा गणित के हिसाब से सत्ताधारी एनडीए के पास शिंदे गुट (40), भाजपा (105), प्रखर जनशक्ति पार्टी (2), अन्य दल (3) व निर्दलीय (12) समेत कुल 162 विधायक हैं, जबकि विपक्षी MVA के पास एनसीपी (53), कांग्रेस (45), उद्धव गुट (17), सपा (2) व अन्य (4) समेत कुल 121 विधायक हैं. ऐसे में यदि शरद पवार के भतीजे अजित पवार का साथ NDA को मिल जाता है और एनसीपी के 30-35 विधायक साथ आ जाते हैं तो सरकार बचाई जा सकती है. 

'जो अलग होने की कोशिश कर रहे, उन पर कड़ा स्टैंड लेंगे'

हालांकि शरद पवार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे तोड़फोड़ की राजनीति के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा, महाराष्ट्र में तोड़फोड़ की राजनीति से राज्य को बड़ा नुकसान हुआ है. तोड़फोड़ की राजनीति वाले अपना काम करें, हमें जो करना है वो करेंगे. उन्होंने अपनी पार्टी में टूट की संभावना पर कहा, किसी के अलग होने की कोशिश, उसकी रणनीति है. हमें कोई स्टैंड लेना होगा तो कड़ा ही लेंगे. अभी कुछ बोलना सही नहीं है.

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