भारत
जो लोग दुबई..दुबई..दुबई करते रहते हैं उन्हें ये विशेष लेख जरूर पढ़ना चाहिए. वहां काम करने गए लोगों की हकीकत जानकर उनकी आंखें खुली की खुली रह जाएंगी
दुबई दुनिया की सबसे आलीशान इमारतों का घर है, जहां सोने की चमक और अमीरों जैसी ज़िंदगी हमारे लिए किसी सपने जैसी है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चमचमाती गगनचुंबी इमारतों के पीछे एक ज़िंदगी छिपी है. चमचमाती दुबई के पीछे एक ऐसा राज़ छिपा है जिससे पूरी दुनिया अनजान है.
ये दुनिया उन गरीब मजदूरों की है जो हर दिन नर्क जैसी जिंदगी जीते हैं. ये अपने परिवार का पेट पालने के लिए अपने देश से दूर दुबई जाते हैं. सोनापुर, अल क्वोज़, जेबेल अली वो इलाके हैं जहाँ दुबई के 'असली हीरो' रहते हैं. बाहर से देखने पर ये किसी मजदूर कैंप जैसा लगता है, लेकिन अंदर का नजारा दिल दहला देने वाला है. यहाँ लोग अपना देश छोड़कर पैसे कमाने आते हैं, लेकिन एक कमरे में 8-10 लोग सोने को मजबूर हैं. इनके बिस्तर पर पतला गद्दा और फटी हुई चादरें हैं. हवा के आवागमन के लिए कमरे में एक छोटी सी खिड़की है, जो गर्मी में बंद रहती है.
दुबई में काम करने गए लोगों की असली हकीकत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुबई जैसे आलीशान शहर में कमाने गए लोगों की यही हकीकत है. उन्हें न सिर्फ़ सोने के लिए, बल्कि बाथरूम इस्तेमाल करने के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती है. क्योंकि यहाँ 50 लोगों के बीच सिर्फ़ एक ही बाथरूम है, उनके लिए सुबह 4 बजे पानी आता है, कभी गर्म पानी आता है, कभी ठंडा पानी आता है और कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि पानी आता ही नहीं. इन इलाकों में तेज़ बदबू होती है और कमरे के हर कोने में बदबू घुली रहती है. यहाँ लोग पसीने से भीगे गंदे कपड़े पहनने को भी मजबूर हैं और उनकी ज़िंदगी किसी भिखारी जैसी कही जा सकती है.
दुबई में जीवन बहुत कठिन है
इस नारकीय जीवन जीने वाले मज़दूरों का कहना है कि उन्हें एजेंट बहकाते हैं. यहाँ 12-14 घंटे काम करने के बाद उन्हें 800-1200 रुपये वेतन मिलता है. इसमें किराया, खाना, बिजली सब शामिल है. ऐसी ज़िंदगी के बीच उनके पास बस थकान और अपने परिवार की यादें हैं. हर साल भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से लाखों लोग दुबई आते हैं. यहाँ आने वाले सभी लोगों का एक ही सपना होता है कि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें और दो साल में पैसे कमाकर अपने देश लौट सकें, लेकिन यहाँ ऐसा नहीं होता, लोग कर्ज़ और बीमारी में फँस जाते हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुबई में जिन जगहों पर ये मजदूर काम करते हैं, वहां तापमान 45-50 डिग्री तक पहुंच जाता है. तब चिलचिलाती धूप में ये मजदूर बिना पानी या ब्रेक के लोहे की चीजें उठाकर काम करते हैं. कई बार मजदूर बेहोश भी हो जाते हैं, लेकिन उन्हें लगातार काम करते रहना पड़ता है और अगर देर हो जाए तो उनकी सैलरी भी काट ली जाती है. इसके अलावा, अगर काम करते हुए कोई हादसा हो जाए, तो कंपनी जिम्मेदारी नहीं लेती, कई कंपनियां तो मजदूरों के पासपोर्ट भी रख लेती हैं ताकि वो काम छोड़कर भाग न सकें. ऐसे में देश-विदेश से दुबई गए लोग बड़ी मुश्किलों का सामना करते हुए काम करते नजर आ रहे हैं.
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