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रेप पीड़िता को इंसाफ देने के लिए छुट्टी के दिन बैठा स्पेशल कोर्ट, जानें किस बात पर किया फैसला

Chhattisgarh News: रेप पीड़िता ने अपने साथ हुई जघन्य घटना के कारण बिना शादी के ठहर गए गर्भ को गिराने की इजाजत कोर्ट से मांगी है. युवती की नाजुक स्थिति को देखते हुए इस केस में स्पेशल सुनवाई की गई है.

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रेप पीड़िता को इंसाफ देने के लिए छुट्टी के दिन बैठा स्पेशल कोर्ट, जानें किस बात पर किया फैसला

Court Hammer (Representative Image)

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Chhattisgarh News: न्याय के लिए कोई भी बात बाधा नहीं बन सकती. यह बात छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साबित हो गई है. कोर्ट में शीतकालीन अवकाश के बावजूद एक रेप पीड़िता को न्याय देने के लिए खासतौर पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की बिलासपुर बेंच ने स्पेशल कोर्ट का आयोजन किया, जिसमें युवती की सारी परेशानी सुनी गई. युवती की बात सुनने के बाद कोर्ट ने उसकी मेडिकल जांच के लिए बोर्ड गठित करने और एक दिन के अंदर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश बिलासपुर के कलेक्टर को दिया है. इतना ही नहीं स्पेशल कोर्ट ने मेडिकल जांच में आने वाला सारा खर्च भी छत्तीसगढ़ राज्य सरकार को वहन करने का निर्देश दिया है. 

क्यों थी तत्काल सुनवाई की जरूरत
दरअसल रेप का शिकार हुई एक युवती इस जघन्य अपराध के कारण गर्भवती हो गई थी. युवती अवाविहित है. इस कारण वह इस गर्भ को नहीं रखना चाहती है. गर्भ 21 सप्ताह का हो चुका है, जिसके चलते उसका गर्भपात करने में परेशानी है. इसी कारण पीड़िता ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए गर्भपात की चिकित्सकीय अनुमति मांगी थी. युवती ने इसमें अपनी पूरी सहमति होने का एफिडेविट भी दाखिल किया था. युवती की याचिका पर शीतकालीन अवकाश के बाद सुनवाई करने से देरी हो सकती थी. इस कारण जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की स्पेशल कोर्ट में उसकी सुनवाई की गई.

26 दिसंबर को देनी होगी कलेक्टर को अपनी रिपोर्ट
सुनवाई के बाद जस्टिस अग्रवाल ने कलेक्टर बिलासपुर को रेप पीड़िता की तत्काल मेडिकल जांच कराने का आदेश दिया. कलेक्टर को मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच कराने और 26 दिसंबर को रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करने का आदेश दिया गया है. साथ ही 7 जून, 2024 की अधिसूचना के तहत याचिकाकर्ता की मेडिकल जांच का सारा खर्च भी राज्य सरकार द्वारा वहन करने का निर्देश दिया है.

मेडिकल बोर्ड करेगा इस बात की जांच
कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड को रेप पीड़िता की शारीरिक और मानसिक स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया है. साथ ही गर्भावस्था के भी हर पहलू की जांच करने को कहा है. इसमें भ्रूण की स्थिति, गर्भपात से याचिकाकर्ता की शारीरिक स्थिति पर होने वाले असर की भी जांच करने को कहा है. मेडिकल बोर्ड में स्त्री रोड विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट व आवश्यकतानुसार अन्य मेंबर शामिल करने को कहा गया है.

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