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India-China News: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) चीन दौरे पर हैं, जहां उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में शिरकत किया था. इस बैठक के बाद उनकी चीन के रक्षा मंत्री के साथ द्विपक्षीय मुलाकात भी हुई है. इसी दौरान उन्होंने चीन के सामने एक फॉर्मूला पेश किया है.
India-China News: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के कारण लगातार तनाव बना रहता है. साल 2020 में गलवां घाटी की हिंसक झड़प के बाद सीमा पर दोनों देश खामोश जरूर हैं, लेकिन तनाव और गतिरोध लगातार चरम पर रहा है. इसके चलते दोनों देशों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control) पर सेना की उपस्थिति बनाए रखने के लिए भारीभरकम खर्च करना पड़ रहा है. अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने चीन को LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए पॉइंट का एक रोडमैप सौंपा है, जिसे फॉलो करने से दोनों देशों के बीच तनाव घटने और आपसी रिश्ते (India-China Relations) गहरे होने का दावा किया जा रहा है. यह रोडमैप रक्षामंत्री ने चीन के किंगदाओ शहर में शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation) की रक्षा मंत्रियों की बैठक से इतर चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डॉन्ग जुंग (Admiral Dong Jun) के साथ हुई द्विपक्षीय मुलाकात में साझा किया है.
चलिए आपको 5 पॉइंट्स में समझाते हैं कि रक्षामंत्री ने क्या फॉर्मूला चीन से शेयर किया है-
1. साल 2024 के एग्रीमेंट का सख्ती से पालन करें दोनों देश
केंद्र सरकार की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के फॉर्मूले में पहला पॉइंट दोनों देशों के बीच गतिरोध खत्म करने के लिए पिछले साल अक्टूर में हुए समझौते (2024 Disengagement Agreement) का सख्ती से पालन करना है. उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे का सम्मान करें और गतिरोध खत्म करने के लिए हुए समझौते को लागू करें, जिसमें डेमचॉक और डेपसांग समेत पूर्वी लद्दाख में टकराव के सारे पॉइंट्स शामिल हैं.
2. LAC पर किसी भी टकराव को टालें
राजनाथ सिंह ने रोडमैप में दूसरा पॉइंट आपसी टकराव को लेकर दिया है. उन्होंने LAC पर किसी भी तरह की उकसावे वाली हरकत से बचने की सलाह दी है. साथ ही दोनों देश आपसी तनाव को कम करने के लगातार प्रयास करते रहें.
3. सीमा विवाद खत्म करने की प्रक्रिया तेज करें
रक्षा मंत्री ने चीन के सामने आपसी विवाद खत्म करने के लिए सीमा निर्धारण प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए आपसी वार्ता को तेज करने का प्रस्ताव रखा है. उन्होंने सीमा प्रबंधन पर जोर दिया है. साथ ही इस मुद्दे पर पहले से स्थापित मैकेनिज्म को दोबारा चालू करके सीमांकन का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है.
4. आपसी विश्वास में आई कमी को दूर करने की जरूरत
रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया है कि दोनों पड़ोसी देशों को साल 2020 के सीमा गतिरोध के बाद आपसी विश्वास में आई कमी को दूर करना होगा. उन्होंने आपसी परस्पर हितों को हासिल करने के साथ-साथ एशिया व विश्व की स्थिरता में योगदान देने के लिए अच्छे पड़ोसियों जैसे हालात बनाने पर जोर दिया है.
5. एससीओ में तनातनी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता
भारत और चीन के रक्षामंत्रियों की यह द्विपक्षीय वार्ता SCO मीटिंग में हुई उस तनातनी के बीच आयोजित की गई, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ के साझा घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) का जिक्र नहीं होने और पाकिस्तान के समर्थन में बलूचिस्तान की घटनाओं का जिक्र किए जाने के कारण उस पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था. इसके चलते भारत की तरफ से एससीओ की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी शिरकत नहीं की गई है. चीनी रक्षा मंत्री के साथ बैठक के दौरान भी राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान की तरफ से फैलाए जा रहे सीमापार आतंकवाद का जिक्र किया. साथ ही इस आतंकवाद के खिलाफ भारत की तरफ से चलाए गए Operation Sindoor की भी जानकारी उन्हें दी है.
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