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महानिदेशक शिविर कार्यालय, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), खान मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आज स्कोप कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में राजभाषा सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया..
महानिदेशक शिविर कार्यालय, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), खान मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आज स्कोप कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में राजभाषा सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ पंजीकरण के उपरांत 10 बजे हुआ और उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़, कुलपति, भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली ने की. इस सम्मेलन का औपचारिक आरंभ श्री मनीष खर, उप महानिदेशक,महानिदेशक शिविर कार्यालय, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के स्वागत संबोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए हिंदी को भारतीय संस्कृति और एकता का प्रतीक बताया.
इस अवसर पर प्रो. रामेश्वर राय, वरिष्ठ लेखक और आलोचक, डॉ.प्रमोद कुमार सिंह, उप महानिदेशक और राजभाषा अधिकारी, GSI मुख्यालय, कोलकाता ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए. उद्घाटन सत्र के दौरान प्रो. सुधीश पचौरी (वरिष्ठ आलोचक एवं मीडिया विश्लेषक) ने भी अपनी उपस्थिति से इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और अपने अद्भुत भाषण से श्रोताओं को संबोधित किया.
पहले सत्र में भारत में हिंदी का विकासित होता बाजार विषय पर गहन चर्चा हुई. इस अवसर पर अनेक प्रख्यात वक्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने यह स्पष्ट किया कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक अवसरों का माध्यम भी है. आज विज्ञापन, डिजिटल मीडिया, मनोरंजन और प्रकाशन जैसे अनेक क्षेत्रों में हिंदी का वर्चस्व लगातार बढ़ रहा है.
हिंदी में उपलब्ध सामग्री का बाज़ार न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी तेजी से फैल रहा है. यह भाषा व्यापार, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है, जिससे हिंदी एक उभरती हुई वैश्विक भाषा के रूप में सामने आ रही है.
दोपहर बाद आयोजित दूसरे सत्र का विषय “मीडिया, सिनेमा और हिंदी” रहा. इस सत्र में भी कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया और यह रेखांकित किया कि मीडिया और सिनेमा हिंदी के प्रसार और लोकप्रियता के सबसे बड़े माध्यम हैं. हिंदी समाचार चैनल, पत्र-पत्रिकाएं और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म जनता तक सूचनाएं सरल और सुलभ तरीके से पहुंचाते हैं. साथ ही, हिंदी फ़िल्में और धारावाहिक न केवल भारतीय दर्शकों में लोकप्रिय हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी हिंदी की पहचान बना रहे हैं. ओटीटी और सोशल मीडिया जैसे नए माध्यमों ने हिंदी को नई पीढ़ी के साथ जोड़ते हुए इसे और अधिक सशक्त और प्रभावी बना दिया है.
सम्मेलन का विशेष आकर्षण प्रसिद्ध रेडियो जॉकी श्री राहुल माकिन (फीवर 104 एफएम) की संगीतमय प्रस्तुति रही, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया. कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन श्रीमती गरिमा शर्मा, कनिष्ठ अनुवाद अधिकारी ने किया.समापन सत्र में डॉ. मुकेश वर्मा, निदेशक एवं राजभाषा अधिकारी, महानिदेशक शिविर कार्यालय, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, सभी वक्ताओं, विशिष्ट अतिथियों, सहभागी प्रतिनिधियों, आयोजन समिति और सभी सहयोगी कार्यालयों का हृदय से आभार व्यक्त किया.
साथ ही यह विश्वास प्रकट किया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों से हिंदी भाषा को और अधिक सशक्त पहचान मिलती रहेगी. यह सम्मेलन हिंदी भाषा के संवर्द्धन, प्रसार और सरकारी कामकाज में इसके अधिकतम प्रयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ.
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