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Bharat Jodo Yatra के 100 दिन, कांग्रेस को कितना जोड़ पाए राहुल गांधी, 10 पॉइंट्स में जानें

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा कन्याकुमारी से शुरू हुई थी. 100 दिन में राहुल का लुक कितना बदला और कांग्रेस को कितना हुआ फायदा आइये जानते हैं.

Bharat Jodo Yatra के 100 दिन, कांग्रेस को कितना जोड़ पाए राहुल गांधी, 10 पॉइंट्स में जानें

भारत जोड़ो यात्रा पर राहुल गांधी. (तस्वीर- Twitter/INC)

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डीएनए हिंदी: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) को आज 100 दिन पूरे हो गए हैं. राहुल अब तक 2,800 किलोमीटर से अधिक पदयात्रा कर चुके हैं. इस दौरान वह अपने समर्थकों के साथ-साथ विरोधियों का भी ध्यान आकर्षित करने में कामयाब रहे हैं. इन 100 दिनों में राहुल गांधी ने न सिर्फ अपनी मजबूत नेता की छीव पेश की है, बल्कि कांग्रेस कैडर में ऊर्जा का एक अभूतपूर्व संचार भी पैदा किया है. अब सवाल यह उठता है कि क्या इस यात्रा ने राहुल गांधी को 2024 की चुनौती के लिए ठोस आधार दे दिया है? साथ ही कांग्रेस को इससे कितनी मजबूती मिली है. आइये 10 पॉइंट्स में समझते हैं.

  1. राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 7 सितंबर 2022 से कन्याकुमारी से शुरू हुई थी, जो अब तक आठ राज्यों तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से गुजर चुकी है. यह यात्रा अब 24 दिसंबर को दिल्ली में दाखिल होगी. फिर लगभग 8 दिन के विश्राम के बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब होते हुए जम्मू-कश्मीर में समाप्त होगी.
  2. इन 100 दिन की भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी ने न सिर्फ मौसम के अनुकूल खुद को ढाला, बल्कि सियासी हवा को अपनी ओर ढालते हुए कांग्रेस कैडर में उत्साह का एक अभूतपूर्व संचार किया.
  3. कांग्रेस को मजबूत करने का असर कर्नाटक में साफ देखने को मिला. जहां सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों गुटों ने एक साथ मिलकर मेहनत की और भारत जोड़ो यात्रा को काफी सफल बनाया. वहीं, महाराष्ट्र में भी कांग्रेस शिवसेना और एनसीपी के पीछे एक छोटी-सी पार्टी बन गई है, लेकिन राहुल गांधी की यात्रा के दौरान कांग्रेस का संगठन वहां मज़बूत दिखाई दिया और कार्यकर्ता में जोश नजर आया.
  4. ऐसा ही नजारा राजस्थान में भी देखने को मिला. राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा की एंट्री से पहले अशोक गहलोत और सचिन पायलट के तकरार को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे थे. लेकिन अशोक गहलोत और सचिन पायलट के आपसी मतभेद के बावजूद संगठन ने भीड़ जुटाने में अहम रोल अदा किया. दोनों ही नेता राहुल गांधी के साथ मंच पर हाथ पकड़कर डांस करते नजर आए.

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5. हालांकि, कांग्रेस का संगठन कितना मज़बूत हआ है, इसकी असल परीक्षा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में होगी. कर्नाटक, मध्यप्रेदश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान समेत कुल 13 राज्य में 2023 में विधानसभा चुनाव होंगे. 2024 के आम चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए ये अग्नि परीक्षा होगी.

6. देश में महंगाई और बेरोजगारी आम जनता के बीच एक बड़ा मुद्दा है. राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर जनता के सामने आवाज उठाई और सरकार को घेरने की कोशिश की. राजनीतिक जानकारों की मानें तो 2024 के आम चुनाव में कांग्रेस को इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता है.

राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा

7. कांग्रेस नेता'भारत जोड़ो यात्रा' 'चुनाव जीतो' या 'चुनाव जिताओ यात्रा' नहीं है. जयराम रमेश ने  इसी दौरान आगे कहा कि यात्रा का एक उद्देश्य यह ज़रूर था कि कांग्रेस संगठन को मज़बूत किया जाए, उसे संजीवनी दी जाए.

8. कांग्रेस का मानना है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का असल मकसद तीन मुद्दों महंगाई, बेरोजगारी, देश में बढ़ रही नफरत के खिलाफ आवाज उठाना है. इस दौरान राहुल जनता के बीच जाकर यह भी संदेश दे रहे हैं कि मीडिया और दूसरे संस्थानों की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो चुकी है. इन सब पर मीडिया को कबजा हो चुका है. इसीलिए वो जनता से सीधे संवाद करने के लिए खुद उनके पास चलकर आए हैं.

9. कन्याकुमारी से निकली इस यात्रा में राहुल गांधी का कारवां बढ़ता ही जा रहा है. इसमें लेखक, अभिनेता, इकोनॉमिस्ट, एक्टिवस्ट, सोशल साइंटिस्ट सभी शामिल हो रहे हैं. इन दिग्गजों के जुड़ने से एक मैसेज निकल रहा है कि देश का एक बड़ा तबका राहुल का नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार है.

10. राहुल की भारत जोड़ो यात्रा में पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन के शामिल होने ने सभी को चौंका दिया. राजन ने राहुल के साथ न सिर्फ कदमताल किया बल्कि उनके साथ देश की इकोनॉमी पर भी चर्चा की. इस दौरान राजन ने नीतिगत मामलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार के लिए अगला साल और भी कठिनाई से भरा रहने वाला है.

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