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Madhya Pradesh News: बेवफा ही निकला 'बेवफा चाय वाला', दुकान पर बैठकर रिश्वत लेते पकड़े गए प्रिंसिपल साहब, जानें पूरी बात

Madhya Pradesh News: सिवनी में लोकायुक्त ने यह कार्रवाई करते हुए स्कूलों से वसूली के अनैतिक खेल का भी खुलासा किया है, जिसमें प्रिंसिपल अपने अंडर आने वाले 26 स्कूलों को RTI का खौफ दिखाकर कमाई कर रहे थे.

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Madhya Pradesh News: बेवफा ही निकला 'बेवफा चाय वाला', दुकान पर बैठकर रिश्वत लेते पकड़े गए प्रिंसिपल साहब, जानें पूरी बात
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Madhya Pradesh news: मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसके बाद लोग कह रहे हैं कि यह 'बेवफा चाय वाला' तो सच में बेवफा निकला. हालांकि जो घटना हुई है, उसमें बेचारे चायवाले का अजब नाम के अलावा कोई दोष नहीं है. दरअसल सिवनी में लोकायुक्त पुलिस ने जनशिक्षा केंद्र बीजा देवरी के प्रभारी प्रिंसिपल मुकेश कुमार नामदेव को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है. इस बात की शिकायत लोकायुक्त पुलिस से की गई थी, जिसके बाद छपारा तहसील के बखारी बस स्टैंड में एक चाय की दुकान पर इस रिश्वत को लेते समय लोकायुक्त ने प्रिंसिपल को रंगेहाथ दबोच लिया. जिस दुकान पर यह कार्रवाई हुई है, उसका नाम 'बेवफा चाय वाला' था.

स्कूलों से वसूली करने की कोशिश कर रहे थे प्रभारी प्रिंसिपल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रभारी प्रिंसिपल नामदेव के खिलाफ जबलपुर में लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक को एक शिकायत दी गई थी. टीवी9 हिंदी की रिपोर्ट में कहा गया है कि शिकायत करने वाले का नाम ढीलन सिंह बिसेन है, जो बीजा देवरी के सरकारी सेकेंडरी स्कूल के प्रधान पाठक हैं. बिसेन ने नामदेव पर जन शिक्षा केंद्र बीजा देवरी के अंडर में आने वाले 26 स्कूलों से अवैध वसूली की कोशिश का आरोप लगाया था. 

RTI का खौफ दिखाकर हो रही थी वसूली
बिसेन ने लोकायुक्त को बताया कि मुकेश नामदेव अपने एक जानकार कमल शुक्ला के जरिये स्कूलों के खिलाफ झूठी RTI लगा रहे थे. इसके बाद स्कूलों से पैसे की मांग की जाती थी और पैसा देने पर दोबारा आरटीआई नहीं लगाने का वादा किया जाता था. इसके लिए नामदेव ने रेट भी तय कर रखे थे. प्राइमरी स्कूल को 1,000 रुपये और सेकेंडरी स्कूल को 1500 रुपये रिश्वत के तौर पर देने थे. सभी स्कूलों से कुल 30,000 रुपये की डिमांड की गई थी. 

ट्रैप बिछाकर दबोचा गया प्रिंसिपल को रंगेहाथ
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक की तरफ से इस शिकायत की जांच लोकायुक्त इंस्पेक्टर रेखा प्रजापति को सौंपी गई थी. पहले शिकायत का वेरीफिकेशन किया गया. इसके बाद प्रिंसिपल को रंगेहाथ दबोचने के लिए ट्रैप बिछाया गया. प्रजापति के मुताबिक, प्रिंसिपल को रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर 10,000 रुपये लेने के लिए बुलाया गया और फिर ये पैसे लेते समय रंगेहाथ दबोच लिया गया. प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर लिया गया है. उनके खिलाफ रिश्वतखोरी का मुकदमा दर्ज किया गया है और इस मामले में अब आगे की कार्रवाई की जा रही है.

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