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'ब्राह्मणों ने बनाया संविधान' हाई कोर्ट के जज की फिसली महासभा के आयोजन में जुबान, जानें और क्या कहा

Karnataka News: भारतीय संविधान को लेकर इस समय सियासी हंगामा मचा हुआ है. सभी राजनीतिक दल संविधान निर्माण में भूमिका के दावों के जरिये दलितों और ब्राह्मण वोटर्स को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में एक हाई कोर्ट जज का ऐसा दावा करना बड़ा हंगामा खड़ा कर सकता है.

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'ब्राह्मणों ने बनाया संविधान' हाई कोर्ट के जज की फिसली महासभा के आयोजन में जुबान, जानें और क्या कहा
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Karnataka News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक जज का हिंदुवादी संगठन के कार्यक्रम में जाकर बयान देने से खड़ा हुआ विवाद अभी तक खत्म नहीं हुआ है. अब एक और हाई कोर्ट जज ने ब्राह्मण महासभा के कार्यक्रम में शामिल होकर ऐसा दावा कर दिया है, जिससे हंगामा मच सकता है. जज ने कहा कि देश का संविधान बनाने में ब्राह्मणों की अहम भूमिका थी, जिसे डॉ. भीम राव आबंडेकर ने खुद स्वीकार किया था. यह बयान ऐसे मौके पर आया है, जब संविधान को लेकर सभी राजनीतिक दलों के बीच एक-दूसरे के ऊपर सियासी बढ़त लेने और दलितों व ब्राह्मण वोटर्स को लुभाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. 

कर्नाटक हाई कोर्ट के जज ने कही ये बात
अखिल कर्नाटक ब्राह्मण महासभा की स्वर्ण जयंती के मौके पर 18-19 जनवरी को दो दिन का ब्राह्मण सम्मेलन 'विश्वामित्र' आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम में पहुंचे कर्नाटक हाई कोर्ट के जज कृष्ण एस. दीक्षित ने संविधान निर्माता डॉ. बीआर आंबेडकर के हवाले से संविधान निर्माण में ब्राह्मणों के योगदान की जानकारी दी. उन्होंने कहा,'भंडारकर इंस्टीट्यूट में डॉ. आंबेडकर ने कहा था कि यदि बीएन राव संविधान का मसौदा तैयार नहीं करते तो इससे बनने में 25 साल लग जाते. संविधान मसौदा समिति के सात में से तीन सदस्य ब्राह्मण थे. ये अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर, एन गोपालस्वामी अयंगर और बीएन राव थे.'

'ब्राह्मण शब्द को जाति के बजाय वर्ण से जोड़ें'
जस्टिस दीक्षित ने कहा,'ब्राह्मण शब्द को जाति के बजाय 'वर्ण' से जोड़ा जाना चाहिए. रामायण लिखने वाले महर्षि वाल्मिकी अनुसूचित जनजाति से थे तो वेदों का वर्गीकरण करने वाले वेदव्यास मछुआरे के पुत्र थे. क्या ब्राह्मणों ने उन्हें नीची नजर से देखा? हम सदियों से भगवान राम की पूजा करते आए हैं और उनके मूल्यों को संविधान में शामिल किया है.' उन्होंने यह भी कहा कि पहले वे गैर-ब्राह्मण राष्ट्रवादी आंदोलनों से जुड़े रहे हैं, जिनसे वे जज बनने के बाद अलग हो गए थे. अब वे जो कुछ भी कह रहे हैं, न्यायिक दायरे में रहकर ही कह रहे हैं.

क्यों आयोजित हो रहे ऐसे भव्य आयोजन
एक अन्य जस्टिस वी. श्रीशानंद ने ब्राह्मण महासभा सम्मेलन को भव्य तरीके से आयोजित करने पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया. दरअसल कुछ लोगों ने कहा था कि समाज मे व्यापत आर्थिक संघर्ष के बीच ऐसे भव्य आयोजन नहीं होने चाहिए. उन्होंने कहा, 'कई लोग प्रश्न करते हैं कि ऐसे वक्त में जब लोग भोजन और शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं तब ऐसे बड़े आयोजनों की क्या जरूरत है. लेकिन ये आयोजन समुदाय को एक साथ लाने और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आवश्यक हैं. ऐसे आयोजन क्यों नहीं किए जाने चाहिए?’

(With PTI-BHASHA News)

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