भारत
आईएनएस विक्रांत भारत में बनने वाले सबसे बड़े युद्धपोत में से एक है.
डीएनए हिंदी: रक्षा के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बन रहा है. रविवार को स्वदेशी विमान वाहक (IAC) 1 ने समुद्री क्षेत्र में ट्रायल शुरू किया. समुद्र में युद्धाभ्यास के लिए इस ट्रायल की शुरुआत की गई. भारतीय नौसेना में विमान वाहक की एंट्री के बाद इसे INS विक्रांत कहा जाएगा. आईएनएस विक्रांत भारत में बनने वाले सबसे बड़े युद्धपोत में से एक है. 40 हजार टन वजनी विमानवाहक पोत ने अगस्त में पांच दिवसीय पहली समुद्री यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की थी. अक्टूबर में इसने 10 दिवसीय समुद्री परीक्षण किया.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक माधवाल के हवाले से कहा, आईएसी को अब जटिल युद्धाभ्यास करने के लिए रवाना किया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि जहाज विभिन्न परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन करता है.
#HarKaamDeshKeNaam
— PRO Defence Kochi (@DefencePROkochi) January 9, 2022
After 2 successive visits by The President @rashtrapatibhvn & The Vice President @VPSecretariat of #India within a span of less than 2 weeks,IAC #Vikrant is now heading out for the next set of SeaTrials(1/3)@PMOIndia@rajnathsingh@indiannavy@AjaybhattBJP4UK pic.twitter.com/7ultrknnke
कमांडर माधवाल ने कहा, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने हाल ही में कोच्चि में जहाज का दौरा किया था. भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की दो लगातार हाई प्रोफाइल यात्राओं के बाद दो सप्ताह से भी कम समय के भीतर आईएसी विक्रांत समुद्री परीक्षणों के अगली यात्रा के लिए तैयार है. राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने प्रगति की समीक्षा करने के बाद परियोजना में शामिल सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं.
फरवरी 2009 में शुरुआत
40 हजार टन के युद्धपोत बनाने की शुरुआत फरवरी 2009 में की गई थी. इसके निर्माण की जिम्मेदारी कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) को सौंप दी गई. सीएसएल ने दिसंबर 2011 में इसे बनाना शुरू किया. बेसिन ट्रायल नवंबर 2020 में पूरा किया गया. अब जहाज के अगस्त 2022 तक नौसेना में शामिल किए जाने की उम्मीद है.
बनेगा बड़ी ताकत
समुद्री क्षेत्र में भारत की बड़ी ताकत बनने जा रहे आईएनएस विक्रांत IAC-1 रूसी निर्मित मिग-29K लड़ाकू विमान और कामोव-31 एयर अर्ली वार्निंग हेलीकाप्टर्स का संचालन करेगा. भारत में बने हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) और लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित शीघ्र ही शामिल किए जाने वाले MH-60R मल्टीरोल हेलीकॉप्टर भी इसमें शामिल किए जाएंगे.
23 हजार करोड़ रुपये की लागत
इस युद्धपोत का निर्माण लगभग 23 हजार करोड़ रुपये की लागत से किया गया है. इसके निर्माण ने भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल कर दिया है जिनके पास अत्याधुनिक विमान वाहक पोत बनाने की क्षमता है.
विशाखापट्टनम स्थित DRDO इसकी सुविधा, नेवी साइंस और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला के कई वैज्ञानिक तीसरे चरण के समुद्री परीक्षणों को देख रहे हैं. इसमें 2300 से अधिक डिब्बे हैं, जिन्हें लगभग 1700 लोगों के दल के लिए डिजाइन किया गया है. जिसमें महिला अधिकारियों के लिए विशेष केबिन भी शामिल हैं.
IAC 262 मीटर लंबा, 62 मीटर चौड़ा है और इसकी ऊंचाई 59 मीटर है. इस समय भारत में एकमात्र विमानवाहक पोत रूसी मूल का आईएनएस विक्रमादित्य है. विक्रमादित्य ने 2013 में नेवी में प्रवेश किया था. नौसेना 36 मल्टीरोल लड़ाकू विमान तैनात करने पर विचार कर रही है जो विक्रमादित्य और नए विक्रांत दोनों की जरूरतों को पूरा करेगा. नौसेना 65,000 टन के बड़े युद्धपोत पर जोर दे रही है. सरकार भी तीसरे विमानवाहक पोत की जरूरत पर विचार कर रही है.