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Deportation से पहले भारतीयों को मिली खुशखबरी, यूएस कोर्ट ने लगाई ट्रंप के ऑर्डर पर अनिश्चितकाल के लिए रोक

Indian's Deportation from America: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही अवैध रूप से रहने वाले अप्रवासियों को उनके देश भेजने का आदेश जारी किया था. इनमें करीब 19 हजार भारतीय भी शामिल हैं, जिनमें से 104 को वापस भेजा जा चुका है.

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Deportation से पहले भारतीयों को मिली खुशखबरी, यूएस कोर्ट ने लगाई ट्रंप के ऑर्डर पर अनिश्चितकाल के लिए रोक
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Indian's Deportation from America: अमेरिका में अपने सपनों की दुनिया सजाने पहुंचे भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स को वापस भारत भेजे जाने के खौफ से बड़ी राहत मिली है. सिएटल की एक फेडरल कोर्ट के जज ने नवनियुक्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के उस नए नागरिकता आदेश (Citizenship Order) पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी है, जिसके तहत अमेरिकी धरती पर जन्म लेने के कारण नागरिकता पाने के अधिकार को खत्म कर दिया गया है. कोर्ट ने इस आदेश की आलोचना करते हुए कहा कि ट्रंप संविधान के साथ 'पॉलिसी गेम' खेलने के लिए कानूनी शासन को दरकिनार करने की कोशिश कर रहे हैं. बता दें कि भारतीय छात्र और प्रोफेशनल्स में ऐसे लोग शामिल हैं, जो वीजा लेकर अमेरिका पहुंचे हैं और ग्रीन कार्ड मिलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इस नागरिकता आदेश के बाद इन्हें वापस भारत भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है. 104 भारतीयों को अमेरिकी सैन्य विमान से वापस भेजा गया है, जबकि करीब 19 हजार भारतीय इस प्रक्रिया के तहत वापस भारत भेजने के लिए अमेरिकी शासन ने चिह्नित किए हैं.

ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है आदेश
सिएटल के जिला जज जॉन कफनौर की तरफ से जारी इस प्रिलिमिनरी निषेधाज्ञा को राष्ट्रपति ट्रंप के लिए करारा झटका माना जा रहा है. व्यापक आव्रजन अभियान के तहत अमेरिकी कानून में बदलाव करने के ट्रंप के प्रयासों के लिए यह दूसरा बड़ा कानूनी झटका है. इससे पहले मैरीलैंड के एक फेडरलल जज देबोराह बोर्डमैन ने भी बुधवार को इसी तरह का फैसला सुनाया था. CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिएटल में गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान जज कफनौर ने कहा, 'यह अब ज्यादा स्पष्ट है कि हमारे राष्ट्रपति के लिए अपने पॉलिसी गोल्स को हासिल करने की राह में कानून का शासन महज एक बाधा मात्र है. उनके (ट्रंप के) हिसाब से कानून का शासन कुछ ऐसा है, जिसे अनदेखी की जा सकती है या फिर राजनीतिक या व्यक्तिगत लाभ के लिए उसे अनदेखा किया जा सकता है. इस कोर्टरूम में और मेरी देखरेख में कानून का शासन वह जलती हुई लौ है, जिसे मैं फॉलो करना चाहूंगा.' 

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