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'नई बात नहीं है...' भारतीयों को यूएस से डिपोर्ट करने पर संसद में हंगामा, 5 पॉइंट्स में जानें सरकार ने दी क्या सफाई

Indians Deport From America: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में अवैध तरीके से घुसे लोगों को उनके देश वापस भेजना शुरू किया है. इसमें करीब 19 हजार भारतीयों को भी चिह्नित किया गया है. इसे लेकर भारतीय संसद में बजट सत्र के दौरान हंगामा हुआ है.

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'नई बात नहीं है...' भारतीयों को यूएस से डिपोर्ट करने पर संसद में हंगामा, 5 पॉइंट्स में जानें सरकार ने दी क्या सफाई
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Indians Deport From America: अमेरिका में अवैध प्रवासी के तौर पर पहुंचे भारतीयों की वापसी पर गुरुवार को भारतीय संसद में जमकर हंगामा हुआ है. विपक्षी दलों ने अमेरिका से 104 भारतीयों को हथकड़ी-बेड़ी लगाकर सैन्य विमान से वापस भारत भेजने को लेकर मोदी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि यदि भारतीयों का वापस भेजा जाना तय था तो मोदी सरकार ने अपना विमान उन्हें लाने के लिए क्यों नहीं भेजा? इस हंगामे के बीच मोदी सरकार की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बयान दिया है, जिसमें उन्होंने सभी सवालों का जवाब दिया है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संधि का जिक्र करते हुए कहा है कि अवैध प्रवासियों को वापस डिपोर्ट करना कोई नई बात नहीं है. यह किसी भी देश में कानूनी तरीके से जाने और अवैध घुसपैठ पर रोक लगाने के लिए है. सरकार फिलहाल इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ लगातार संपर्क में बनी हुई है.

5 पॉइंट्स में जानिए जयशंकर ने क्या बात कही है-

1- 'अमेरिका से डिपोर्टेशन नई बात नहीं' 
जयशंकर ने राज्यसभा में कहा कि दो देशों के बीच तय समझौते और सभी देशों के हस्ताक्षर वाली संयुक्त राष्ट्र संघ की संधि के तहत किसी को डिपोर्ट किया जाता है. अमेरिका से भारतीयों को डिपोर्ट करना कोई नई प्रक्रिया नहीं है. ऐसा कई सालों से किया जा रहा है. अमेरिका ने अभी 104 भारतीयों को डिपोर्ट किया है. विदेश में अवैध तरीके से रहने वाले अपने नागरिकों को वापस लेने की जिम्मेदारी सभी देशों की होती है. 

2- क्यों लगाई जाती है हथकड़ी-बेड़ी?
जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया है कि अवैध प्रवासियों के डिपोर्टशन के दौरान उन्हें हथकड़ी-बेड़ी क्यों लगाई जाती है? उन्होंने कहा,'अमेरिकी एजेंसी ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट) ने डिपोर्ट करने की प्रक्रिया की जानकारी दी है. वहां साल 2012 में अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट करने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रॉसिजर (SOP) लागू हुई थी. इसके तहत किसी को डिपोर्ट करते समय फ्लाइट में बांधकर रखने का प्रावधान किया गया था. 

3- महिलाओं-बच्चों के नहीं लगाते हथकड़ी
जयशंकर ने कहा कि ICE ने यह भी बताया है कि डिपोर्ट करने के दौरान महिलाओं-बच्चों के लिए अलग नियम हैं. यदि डिपोर्ट करने वालों में यदि महिलाएं-बच्चे शामिल होते हैं, तो उन्हें बांधकर नहीं रखा जाता है. डिपोर्ट किए जा रहे यात्री यदि फ्लाइट में टॉयलेट जाते हैं तो इस दौरान उनके restraints हटा दिए जाते हैं.  

4- 'अमेरिकी सरकार से लगातार संपर्क में हम' 
जयशंकर ने कहा कि हमने उन भारतीयों के अनुभव जाने हैं, जिन्हें डिपोर्ट किया गया है. उन्होंने डिपोर्टेशन के दौरान हुई कठिनाइयों की जानकारी दी है. हम इसे देख रहे हैं और इसे लेकर लगातार अमेरिकी सरकार के संपर्क में हैं. भारत सरकार डिपोर्ट के दौरान भारतीयों से कोई गलत व्यवहार नहीं हो, इसके लिए लगातार अमेरिकी सरकार से बात कर रही है.

5- मानव तस्करी करने वालों पर करेंगे कड़ी कार्रवाई
जयशंकर ने कहा कि अवैध तरीके से घुसबैठ को रोकना और कानूनी तरीके से लोगों की आवाजाही को बढ़ाना हर देश के लिए जरूरी है. उन एजेंट्स पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, जो मानव तस्करी कर रहे हैं.  

19 हजार भारतीयों को वापस भेजेगा अमेरिका
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के राष्ट्रपति बनने के बाद अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का काम शुरू हुआ है. ट्रंप सभी देशों के अवैध प्रवासियों को चिह्नित कराकर सैन्य विमानों से वापस उनके देश भेज रहे हैं. भारत के 104 नागरिकों को पहली खेप वहां से डिपोर्ट की गई है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने बताया है कि करीब 19 हजार अवैध प्रवासी भारतीय चिह्नित किए गए हैं. इन सभी को वापस भेजा जाएगा.

ट्रंप-मोदी की दोस्ती पर उठाया विपक्ष ने सवाल
भारतीय अवैध प्रवासियों को अमेरिका से वापस भेजने को भी विपक्षी दलों ने संसद में मुद्दा बना लिया है. विपक्षी सांसदों ने हथकड़ियां पहनकर सरकार के खिलाफ संसद के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन किया है. उन्होंने खासतौर पर यह सवाल किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप यदि आपस में अच्छे दोस्त हैं तो फिर ऐसा क्यों हुआ है? कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने हथकड़ी-बेड़ी लगाए जाने को लेकर सवाल पूछा कि क्या इंसानों के साथ ऐसा व्यवहार होता है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसका जवाब देना चाहिए. इसके बाद ही सरकार ने संसद में जवाब दिया है.

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