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India-Russia Defence Partnership: एक तरफ जहां दुनियाभर में पुराने देशों के बीच बने रिश्ते कमजोर पड़ रहे हैं, ताकत का संतुलन बदल रहा है. वहीं दूसरी ओर भारत और रूस दोस्ती, साझेदारी और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है. बता दें दोनों देशों के बीच RELOS लागू हो गया है. आइए जानें इसके बारे में..
India-Russia Defence Partnership: दुनियाभर में भरोसे का संकट बढ़ता जा रहा है, खासतौर से ईरान से जुड़े तनाव ने इस स्थिति को और ज्यादा गहरा कर दिया है. पुराने देशों के बीच बने रिश्ते कमजोर पड़ रहे हैं और ताकत का संतुलन भी बदल रहा है. वहीं दूसरी ओर भारत और रूस दोस्ती, साझेदारी और परस्पर विश्वास की नई इबारत लिख रहा है. इस साझेदारी के आने वाले समय में बड़े सामरिक और रणनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं. RELOS के तहत अब दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर 3000 तक सैनिक, सीमित संख्या में नौसैनिक जहाज और सैन्य विमान तैनात कर सकेंगे. भारत और रूस ने फरवरी 2025 में इस महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक समझौता पर हस्ताक्षर किए थे, जो जनवरी 2026 से लागू हो गया है.
इंडो-रूसी रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट यानी RELOS भारत और रूस के बीच होने वाला एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता है. यह इस साल 12 जनवरी से प्रभाव में आ गया है, जिसकी जानकारी रूस के आधिकारिक कानूनी सूचना पोर्टल ने शुक्रवार को दी. बता दें कि इस समझौते के तहत भारत और रूस अब एक-दूसरे के क्षेत्र में सीमित संख्या में अपनी सैना तैनात कर सकते हैं. इसमें अधिकतम 3,000 सैनिक, 5 युद्धपोत और 10 विमान शामिल हैं. एक साथ इन्हें तैनात किया जा सकता है. बता दें कि यह तैनाती शुरुआती तौर पर 5 साल के लिए होगी, जिसे दोनों देशों की सहमति से आगे 5 साल और बढ़ाया जा सकता है.
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दिसंबर 2025 में रूस की संसद (डूमा) में इस समझौते को मंजूरी मिली थी और फिर अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के प्रथम उपाध्यक्ष व्याचेस्लाव निकोनोव ने संसद में इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह समझौता दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और लॉजिस्टिक सपोर्ट को और मजबूत करेगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह समझौता भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने वाला कदम है, इससे दोनों देश जरूरत के समय एक-दूसरे के सैन्य संसाधनों और ठिकानों का बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे.
भारत और रूस के बीच हुआ पारस्परिक लॉजिस्टिक्स विनिमय समझौता (RELOS) दोनों देशों के सैन्य सहयोग को नए स्तर पर ले जाने वाला अहम कदम है. इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और मानवीय सहायता मिशन भी शामिल हैं. वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और यूक्रेन युद्ध के बीच यह समझौता और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है. यह समझौता न केवल सैन्य कर्मियों और उपकरणों की आवाजाही को व्यवस्थित करता है, बल्कि उनके लिए जरूरी लॉजिस्टिक्स यानी साजो-सामान और सपोर्ट सिस्टम को भी सुचारू बनाता है.
इस समझौते से भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग तो मजबूत होगा ही, साथ ही दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं जैसे एयरबेस और बंदरगाहों का इस्तेमाल कर सकेंगे. ऐसे में जरूरत पड़ने पर जहाजों, विमानों और सैनिकों को आसानी से मदद मिल सकेगी. इसके अलावा इससे भारत को खास फायदा यह होगा कि उसे रूस के नौसैनिक अड्डों और एयरबेस तक पहुंच मिलेगी, जिनमें आर्कटिक जैसे अहम इलाके भी शामिल हैं.
रूस को भी भारत की सैन्य सुविधाओं का उपयोग करने की सुविधा मिलेगी, जिससे दोनों देशों के बीच तालमेल और बेहतर होगा. यह समझौता सिर्फ सुविधाओं के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सैनिकों की तैनाती भी शामिल है. इसके जरिए दोनों देश मिलकर सैन्य अभ्यास, आपदा राहत और जरूरत पड़ने पर संयुक्त ऑपरेशन ज्यादा प्रभावी तरीके से कर सकेंगे.
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