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India-Pakistan Conflict के पीछे था चीन? क्या US को कहेंगे थैंक्स, 5 पॉइंट्स में पढ़ें क्या था S. Jaishankar का रिएक्शन

India-Pakistan Conflict Updates: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जर्मनी के न्यूजपेपर Frankfurter Allgemeine Zeitung को इंटरव्यू दिया है. इस दौरान उनसे भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर कई तरह के सवाल पूछे गए हैं. 

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India-Pakistan Conflict के पीछे था चीन? क्या US को कहेंगे थैंक्स, 5 पॉइंट्स में पढ़ें क्या था S. Jaishankar का रिएक्शन

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जर्मन न्यूजपेपर को दिया इंटरव्यू अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया है.

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India-Pakistan Conflict Updates: भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष के बाद सीमा पर भले ही सीजफायर हो गया है, लेकिन भारत कूटनीति की टेबल पर पाकिस्तान का आतंकी चेहरा सारी दुनिया में उजागर करने की कवायद में जुटा हुआ है. इसके लिए कई देशों में सांसदों के प्रतिनिधिमंडल भेजे गए हैं. इसी दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर से एक इंटरव्यू में भारत और पाकिस्तान के सैन्य संघर्ष के पीछे चीन की भूमिका को लेकर सवाल पूछा गया है. साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर के लिए अमेरिका को धन्यवाद कहा जाना चाहिए? ये सारे सवाल जर्मनी के न्यूजपेपर Frankfurter Allgemeine Zeitung के साथ हुए इंटरव्यू के दौरान विदेश मंत्री ने बेहद स्पष्ट तरीके से भारत के रुख को पेश किया है. उन्होंने चीन का नाम लिए बिना कहा कि सब अपने-अपने अनुमान लगा रहे हैं. साथ ही अमेरिका के मुद्दे पर माना कि उसका प्रभुत्व है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सामरिक निर्णयों में भारत का अपना स्वतंत्र रुख है. 

विदेश मंत्री ने चीन, अमेरिका और पाकिस्तान को लेकर इंटरव्यू में क्या कहा है, चलिए 5 पॉइंट्स में जानते हैं-

1. 'पाकिस्तान और चीन बेहद करीबी हैं'
विदेश मंत्री जयशंकर से जब संघर्ष में चीन के रोल को लेकर पूछा गया तो उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा,'आप जानते हैं पाकिस्तान के पास अधिकतर हथियार चीन में बने हुए हैं और दोनों देश आपस में बेहद करीबी हैं. ऐसे में आप अपना अनुमान इससे खुद लगा सकते हैं.'

2. 'थक चुका हूं परमाणु हथियार के सवाल से'
जयशंकर से जब यह पूछा गया कि क्या ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान भारत-पाकिस्तान संघर्ष परमाणु युद्ध में बदल सकता था? जवाब में जयशंकर ने कहा,'मैं परमाणु हथियार के सवाल से थक चुका हूं. दक्षिण एशिया में कुछ भी हो पश्चिम उसे तत्काल परमाणु संकट से जोड़ देता है. परमाणु युद्ध से हम बेहद, बेहद दूर थे. हमने आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया, जो बेहद सावधानी से बिना कोई उकसावे वाला कदम उठाए चुने गए थे. इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने हम पर फायर किया. हमने उन्हें दिखा दिया कि हम उनका एयर डिफेंस सिस्टम बरबाद कर सकते हैं. इसके बाद उनके (पाकिस्तान के) ही आग्रह पर फायरिंग रोकी गई.

3. क्या भारत-पाक सीजफायर के लिए अमेरिका को धन्यवाद कहेंगे?
एस. जयशंकर से यह भी पूछा गया कि क्या भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर (India Pakistan Ceasefire) कराने में अमेरिकी हस्तक्षेप का योगदान था? उन्होंने कहा,'फायरिंग रोकने पर सहमति बनाने का फैसला दोनों तरफ के मिलिट्री कमांडर्स के बीच सीधे संपर्क से हुए था. इससे पहली सुबह हमने पाकिस्तान के मुख्य एयर बेसों और एयर डिफेंस सिस्टम को प्रभावी तरीके से हिट करके अक्षम बना दिया था. इसलिए संघर्ष समाप्त होने के लिए मैं किसे धन्यवाद दूं? मैं भारतीय सेना को धन्यवाद कहता हूं, क्योंकि यह उसका एक्शन था कि पाकिस्तान ने गुहार लगाते हुए कहा- हम बंद करने के लिए तैयार हैं.'

4. वैश्विक मामलों में अमेरिका की भूमिका को कैसे देखते हैं?
एस. जयशंकर से यह भी पूछा गया कि वैश्विक मामलों में अमेरिका जिस तरह हस्तक्षेप करता है और अपना प्रभाव दिखाता है, उसे लेकर वे क्या रुख रखते हैं? इस पर विदेश मंत्री ने कहा,'अमेरिका का प्रभाव रहता है, लेकिन भारत का अपने सामरिक निर्णयों में खुद का स्वतंत्र रुख है. हमसे जिसने भी बात की, अमेरिका ही नहीं हर एक को हमने एक बात स्पष्ट कर दी कि पाकिस्तान को यदि लड़ाई बंद करनी है तो उसे हमें बताना होगा. हमें उनसे यह सुनना है. उनके जनरल को हमारे जनरल को फोन करके यह कहना होगा और फिर यही हुआ.'

5. 'आतंकियों को हमने स्पष्ट संदेश दिया'
जयशंकर ने यह भी कहा कि हमने आतंकियों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उन्हें इस तरह के हमले (पहलगाम हमला) करने का मूल्य चुकाना होगा. बता दें कि भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) के बाद हुआ था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी. इनमें अधिकतर हिंदू टूरिस्ट्स थे. इसके बाद सैन्य संघर्ष के दौरान भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी, जिसके जवाब में पाकिस्तानी सेना के हमला करने पर उसके भी कई एयरबेस तबाह कर दिए गए थे. इसके बाद 10 मई को दोनों देशों के बीच सीजफायर हो गया था.

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