भारत
पहलगाम हमले के जवाब में देर रात 'ऑपरेशन सिंदूर', इंडियन आर्मी ने PoK में 9 आतंकी ठिकानों को बनाया निशाना बनाया है. अब युद्ध जैसी स्थिति के लिए भी भारत सतर्क है. भारत में आज मॉक ड्रिल भी होनी है. इसी बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष में ऐसी उपलब्धि हासिल की है .
विश्व उस समय हैरान रह गया जब अमेरिका ने चीन पर अंतरिक्ष में 'हवाई युद्ध' का आरोप लगाया. लेकिन अब भारत ने भी ऐसी ही उपलब्धि हासिल कर ली है. पाकिस्तान कभी यह सोच भी नहीं सकता कि इसरो ने स्पैडेक्स मिशन के तहत क्या किया. दो भारतीय उपग्रहों को अंतरिक्ष में 29,000 किमी/घंटा की गति से एक दूसरे की परिक्रमा करने के लिए बाध्य किया गया.
स्पैडेक्स (स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट) मिशन का उद्देश्य उपग्रहों में स्वचालित डॉकिंग-अनडॉकिंग तकनीक का परीक्षण करना था. यह मिशन पहले ही सफल हो चुका था. लेकिन जब इसरो ने पाया कि दोनों उपग्रहों - एसडीएक्स 01 और एसडीएक्स 02 - में अभी भी लगभग 50% ईंधन बचा हुआ है, तो वैज्ञानिकों ने उन्हें एक और कठिन परीक्षण के लिए उपयोग करने का निर्णय लिया.
इसके बाद जो हुआ वह भी उतना ही आश्चर्यजनक था. दोनों उपग्रहों को अत्यंत सटीक गणना और नियंत्रण के साथ एक दूसरे के करीब लाया गया, उनकी गति और दिशा इस प्रकार बदली गई मानो वायुसेना के लड़ाकू विमान आसमान में आमने-सामने टक्कर का अभ्यास कर रहे हों. ये उपग्रह 28,800 किमी/घंटा की गति से उड़ रहे थे, जो किसी भी सामान्य विमान से 28 गुना अधिक तेज है.
इसरो ने पूरे अभ्यास को 'तकनीकी रूप से बहुत जटिल और चुनौतीपूर्ण' बताया है. यह इसरो की क्षमताओं का एक पहलू दर्शाता है जो सिर्फ रॉकेट प्रक्षेपण से कहीं आगे तक जाती है. यह वास्तविक 'अंतरिक्ष युद्ध' की तैयारी का संकेत है.
पाकिस्तान कहां खड़ा है?
जबकि भारत अंतरिक्ष में ऐसी उन्नत तकनीक का परीक्षण कर रहा है, पाकिस्तान अभी भी जीपीएस के लिए चीन और अमेरिका पर निर्भर है. इसके पास न तो कक्षीय प्रौद्योगिकी है और न ही ऐसा कोई कार्यक्रम है जो SPADEX जैसी परियोजनाओं से मेल खाता हो. भारत का यह कदम न केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि है बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है कि हम न केवल पृथ्वी पर बल्कि अंतरिक्ष में भी तैयार हैं.
जब चीन के कारण अमेरिका में तनाव बढ़ा
मार्च 2025 में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने चीन पर अपने उपग्रहों के साथ अंतरिक्ष में हवाई युद्ध करने का आरोप लगाया था. संयुक्त राज्य अमेरिका ने इसे एक संभावित सैन्य खतरे के रूप में देखा. अब भारत ने भी ऐसा ही अभ्यास किया है, लेकिन बहुत ही शांत और वैज्ञानिक तरीके से. यह भारत की बढ़ती अंतरिक्ष रक्षा और कक्षीय प्रभुत्व की एक झलक है.
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