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Who is Sonia Singh: लाल किले पर PM मोदी संग तिरंगा फहराने वाली कैप्टन सोनिया सिंह चौहान कौन? खूब हो रही चर्चा

Who is Sonia Singh Chauhan: लाल किले पर पीएम मोदी के साथ तिरंगा फहराकर चर्चा में आईं कैप्टन सोनिया सिंह चौहान कौन हैं? चलिए स्वतंत्रता दिवस के इस ऐतिहासिक पल और सैन्य प्रोटोकॉल के बारे में पूरी डिटेल्स हम आपको बताते हैं.

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Who is Sonia Singh: लाल किले पर PM मोदी संग तिरंगा फहराने वाली कैप्टन सोनिया सिंह चौहान कौन? खूब हो रही चर्चा

Image Credit: Social Media

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Sonia Singh Chauhan Kaun Hain: हर साल स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देश की निगाहें लाल किले की ऐतिहासिक पल पर टिकी होती हैं. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तिरंगा फहराते हैं और 21 तोपों की गड़गड़ाहट के बीच राष्ट्रगान गूंजता है, तो हर भारतीय गर्वांवित महसूस करता है. इस बार 80वें स्वतंत्रता दिवस के इस खास और भव्य समारोह में पीएम मोदी के साथ बेहद मुस्तैद और अनुशासित मुद्रा में खड़ी कैप्टन सोनिया सिंह चौहान ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ उनकी चर्चा हो रही है. आइए विस्तार से जानते हैं कि सेना की यह जांबाज अफसर कौन हैं, लाल किले के ध्वजारोहण का कड़ा सैन्य प्रोटोकॉल क्या कहता है और देश की युवा बेटियां इस गौरवशाली मुकाम तक कैसे पहुंच सकती हैं.

कौन हैं कैप्टन सोनिया सिंह चौहान?

कैप्टन सोनिया सिंह चौहान भारतीय सेना की एक बेहद प्रतिभाशाली और अनुशासित महिला अधिकारी हैं. वे आर्म्ड फोर्सेस की उस मजबूत पीढ़ी का हिस्सा हैं, जो अपनी काबिलियत और कर्तव्यनिष्ठा के दम पर हर मोर्चे पर देश का नेतृत्व कर रही हैं. स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय और संवेदनशील पर्व पर रक्षा मंत्रालय तथा तीनों सेनाओं के कड़े समन्वय के बीच प्रधानमंत्री की सहायता करने की जिम्मेदारी मिलना अपने आप में बेहद गर्व का विषय है. कैप्टन सोनिया ने अपनी इस ऐतिहासिक भूमिका को जिस बेहतरीन सैन्य अनुशासन के साथ निभाया है, उसने देश भर में 'नारी शक्ति' की एक मिसाल कायम कर दी है.

लाल किले पर ध्वजारोहण का सैन्य प्रोटोकॉल

लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराना कोई साधारण कार्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे महीनों की कड़ी मेहनत और सेना का तयशुदा सख्त प्रोटोकॉल काम करता है.

जीरो एरर का नियम: झंडा फहराने के सटीक समय से लेकर राष्ट्रगान की धुन और 21 तोपों की सलामी तक, टाइमिंग पहले ही तय की दी जाती है.

सैन्य बलों का कोऑर्डिनेशन: इस भव्य समारोह के संचालन और कोऑर्डिनेशन की जिम्मेदारी रोटेशन के आधार पर थल सेना, नौसेना और वायुसेना को दी जाती है.

सहायक अधिकारी की भूमिका: प्रधानमंत्री के साथ मंच पर रहकर ध्वज की डोर को संभालने और प्रोटोकॉल पूरा करने के लिए केवल चुनिंदा और उत्कृष्ट अधिकारियों को ही चुना जाता है, जिसके लिए हफ्तों पहले से स्पेशल रिहर्सल की जाती है.

देश के लिए प्रेरणा की मिसाल हैं सोनिया सिंह

लाल किले पर कैप्टन सोनिया सिंह चौहान की यह शानदार उपस्थिति देश की युवा पीढ़ी, खासकर बेटियों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है. आज के दौर में काफी कुछ बदल चुका है; भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका अब केवल दफ्तर के कामों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सरहदों की सुरक्षा से लेकर युद्धक विमान उड़ाने और राष्ट्रीय पर्वों के मुख्य मंचों की शोभा बढ़ाने तक हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं. कैप्टन सोनिया की यह तस्वीर हर उस बेटी को हिम्मत देती है, जो सेना में जाकर देश सेवा करने का सपना देखती है.

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