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Maqbool Bhat की बरसी पर नहीं बंद हुआ कश्मीर, सड़कों पर दिखी रौनक और बाजार भी खुले

कश्मीर में हालात अब पहले से अलग हैं. 11 फरवरी को बाजारों का खुलना और श्रीनगर की सड़कों पर रौनक दिखना गवाह है. अब तक 11 फरवरी को कश्मीर बंद होता था. 

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 Maqbool Bhat की बरसी पर नहीं बंद हुआ कश्मीर, सड़कों पर दिखी रौनक और बाजार भी खुले
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डीएनए हिंदी: कश्मीर के हालात अब बदल रहे हैं और स्थितियां सामान्य हो रही हैं. इस साल 11 फरवरी को श्रीनगर की सड़कों पर चहल-पहल दिखी और बाजार भी खुले रहे. अब तक हर साल 11 फरवरी को हुर्रियत की ओर से कश्मीर बंद बुलाया जाता था. 11 फरवरी को मकबूल भट्ट की बरसी होती है लेकिन इस बार बंद बुलाने के बाद भी बेअसर रहा है. 

9 से 11 फरवरी तक घाटी में सुरक्षा हाई अलर्ट 
इस साल कश्मीर बंद का कोई असर नहीं दिखा है लेकिन फिर भी सुरक्षा व्यवस्था अलर्ट पर थी. 9 फरवरी को अफजल गुरु को फांसी दी गई थी और 11 फरवरी को मकबूल भट्ट की बरसी होती है. इस पिछले कुछ सालों से 9 से 11 फरवरी तक कश्मीर बंद बुलाया जाता था और इस दौरान हिंसा की घटनाएं भी होती थीं. इस साल माहौल पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा है. 

हुर्रियत नेता की अपील रही बेअसर 
बता दें कि सोशल नेटवर्किंग साइट पर एक ट्वीट में ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मस्सर्रत आलम की ओर से कश्मीरियों को बंद का समर्थन करने की अपील की गई थी. इस अपील का कोई असर 11 फरवरी को श्रीनगर में नहीं दिखा है. 

मकबूल भट ने JKLF का एक विंग बनाया था. जिसे जम्मू-कश्मीर नेशनल लिबरेशन फ्रंट (JKLNF) का नाम दिया गया था. 11 फरवरी 1984 को दिल्ली के तिहाड़ जेल में भट्ट को फांसी दी गई थी. अलगाववादी दल उसे कश्मीर में लंबे समय तक हीरो की तरह पेश करते रहे थे.         

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