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40 साल बाद किसी सहकारी चीनी मिल का चुनाव लड़ रहे अजित पवार ने घोषणा की है कि अगर वह मालेगांव सहकारी चीनी मिल का चुनाव जीत गए तो वह इसके अध्यक्ष बन जाएंगे.
महाराष्ट्र के बारामती में मालेगांव सहकारी चीनी मिल चुनाव के लिए पवार परिवार - शरद पवार और उनके भतीजे अजित एक बार फिर आमने-सामने हैं. महाराष्ट्र के संदर्भ में यह चुनाव भले ही कम महत्व का हो, लेकिन इसने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींचा है और यह दो विरोधी एनसीपी गुटों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है.
बारामती में प्रतिष्ठा की लड़ाई
40 साल बाद सहकारी चीनी मिल का चुनाव लड़ रहे अजित पवार ने घोषणा की है कि अगर वे चुनाव जीतते हैं तो वे अध्यक्ष बनेंगे. अजीत नीलकंठेश्वर पैनल का नेतृत्व कर रहे हैं, जो वर्तमान में चीनी मिल को नियंत्रित करता है. एनसीपी (एसपी), जिसका अभियान शरद पवार, सुप्रिया सुले और युगेंद्र पवार के नेतृत्व में चल रहा है, 'बलीराजा सहकार बचाओ पैनल' के माध्यम से चुनाव लड़ रही है.
एक अन्य समूह, सहकार बचाओ पैनल, जिसका नेतृत्व रंजन टावरे कर रहे हैं, भी चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे यह त्रिकोणीय लड़ाई बन गई है. चुनाव 22 जून को होने हैं, जिसके परिणाम 24 जून को घोषित किए जाएंगे. पिछले साल के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पता चला कि एनसीपी (एसपी), जिसका सहकारी क्षेत्र, खासकर महाराष्ट्र के चीनी क्षेत्र में काफी प्रभाव था, अपनी पकड़ खोती दिख रही है.
ध्यान रहे कि पवार बनाम पवार टकराव तब हुआ जब शरद पवार ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अपने भतीजे के साथ गठबंधन की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया, जिससे अफवाहों पर विराम लग गया.
नकदी वितरण के आरोप
हालांकि, चुनाव से पहले, चुनाव को प्रभावित करने के लिए नकदी वितरण के आरोप लगे हैं. सहकार बचाव पैनल ने आरोप लगाया है कि अमराई में पुणे जिला केंद्रीय सहकारी (पीडीसीसी) बैंक को असामान्य रूप से देर रात तक खुला रखा गया था और परिसर से नकदी वितरित की जा रही थी.
बैंक का कार्य समय शाम 5 बजे तक है. पैनल के प्रतिनिधि रंजन टावरे ने अजित पवार के निजी सहायक सुनील मुसले की देर रात बैंक में मौजूदगी पर सवाल उठाया.
टावरे ने कहा, 'रात 11 बजे सुनील मुसले को बैंक में कौन सा आधिकारिक काम था?' उन्होंने यह भी दावा किया कि मंत्री दत्तात्रेय भराणे के सहयोगी भी उस स्थान पर देखे गए थे.
टावरे ने आरोप लगाया, 'हमने मुसले को कार में बैंक से निकलते देखा. अंदर पैसे पैक करने से जुड़ी गतिविधि दिखी.'
शरद पवार के पोते युगेंद्र पवार ने सवाल उठाया कि बैंक में मतदाता सूचियां क्यों मौजूद थीं. उन्होंने यह भी बताया कि सहकारी और शैक्षणिक संस्थानों की सूचियां भी वहां पाई गईं. युगेंद्र ने चुटकी लेते हुए कहा, 'शायद बैंक पर बढ़ते लोड के कारण इसे रात 11 बजे तक खुला रखना पड़ा.'