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मादा मच्छर को गंध और नजर, दोनों की जरूरत पड़ती है. उनमें 100 फीट दूर से गंध को सूंघ लेने की क्षमता होती है.
डीएनए हिंदी: गर्मियों की शुरुआत के साथ ही मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ने लगा है. इसके चलते लोगों के बीच अभी से मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों (Mosquito-Borne Diseases) का डर भी देखने को मिल रहा है. हो भी क्यों ना हर साल ये मच्छर बड़े पैमाने पर लोगों को बीमार करते हैं लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर मच्छर कैसे तय करते हैं कि किसका खून चूसना है? अगर नहीं तो आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं.
यह बात तो सभी जानते हैं कि केवल मादा मच्छर ही खून चूसती हैं, नर मच्छर ऐसा नहीं करते लेकिन सोचने वाली बात यह है कि मादा मच्छर कैसे निर्धारित करती हैं कि किस व्यक्ति को अपना शिकार बनाना है? विज्ञान की दुनिया ने अब इसका पता भी लगा लिया गया है.
मच्छरों पर किए गए एक शोध में पता चला है कि अपने शिकार का पता लगाने के लिए मादा मच्छर को गंध और नजर, दोनों की जरूरत पड़ती है. उदाहरण के लिए, सांस लेते वक्त हम कार्बन डाइऑक्सइड (CO2) छोड़ते हैं जिसकी एक अलग प्रकार की गंध होती है. मादा मच्छर इसी गंध को सूंघते-सूंघते इंसान के पास पहुंचती है और फिर अपनी नजर का इस्तेमाल करके उन्हें शिकार बनाती है.
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वैज्ञानिकों ने बताया, मादा मच्छरों में 100 फीट दूर से गंध को सूंघ लेने की क्षमता होती है. हम एक सेकंड में जितनी हवा सांस के जरिए छोड़ते हैं उसमें 5% मात्रा कार्बन डाइऑक्साइड की होती है. इसे सूंघते ही मादा मच्छर इंसान की तरफ तेजी से उड़ती है.
इसके अलावा रिसर्च में यह भी पता चला है कि चक्कर काटती चीजों की तरफ भी मच्छर ज्यादा आकर्षित होते हैं हालांकि कार्बन डाइऑक्साइड के मुकाबले ऐसा कम ही होता है.
वैज्ञानिकों ने कहा, अगर मादा मच्छरों में सूंघने की क्षमता खत्म कर दी जाए तो हम मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों से बच सकते हैं लिहाजा मादा मच्छरों में सूंघने की क्षमता को खत्म करने की दिशा में प्रयास किया जाएगा.
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