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Goa News: गोवा में सियासी घमासान बढ़ता ही जा रहा है. बात-बात पर भाजपा सरकार को घेर रहे विपक्षी दलों ने अब खेती की जमीन कैसीनो को देने के मुद्दा उठाया है. नेता विपक्ष यूरी अलेमाओ ने इसे क्रोनी कैपिटलिज्म का नमूना बताया है.
Goa News: गोवा में सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के बीच चल रहा सियासी घमासान बढ़ता ही जा रहा है. विपक्षी दल अलग-अलग मुद्दों पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत को घेर रहे हैं. अब उन्होंने कृषि जमीन को रिजॉर्ट डेवलपमेंट के लिए देने और वहां कैसीनो खुलवाने को लेकर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है. नेता विपक्ष यूरी अलेमाओ ने इसे 'क्रोनी कैपिटलिज्म' का नमूना बताया है. साथ ही सरकार पर किसानों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है.
क्या है वो प्रोजेक्ट, जिसे लेकर मचा हंगामा
पर्णेम के धारगाल में CADA ने 3.33 लाख वर्ग मीटर अधिसूचित कृषि भूमि एक कंपनी को दी है. डेल्टा कॉर्प लिमिटेड नाम की यह कंपनी इस जमीन पर 'इंटिग्रेटिड रिजॉर्ट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' ला रही है. यूरी अलेमाओ का आरोप है कि इस रिजॉर्ट प्रोजेक्ट का मुख्य हिस्सा कैसीनो संचालन है. उन्होंने इसे लेकर ही मुख्यमंत्री सावंत और भाजपा सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा है कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करने वाली सरकार अब उनकी जमीन छीनकर जुआघर चलाने वालों को दे रही है. अलेमाओ ने इसे किसानों के साथ विश्वासघात और 'दोस्तों' को लाभ पहुंचाने वाले क्रोनी कैपिटलिज्म का सटीक उदाहरण बताया है.
— Yuri Alemao (@Yurialemao9) May 12, 2025
'पणजी को बनाया पाप नगरी, अब गांवों की शांति करेंगे तबाह'
अलेमाओ ने इस प्रोजेक्ट को CADA के मूल उद्देश्य यानी कृषि उपयोग के खिलाफ बताया और तत्काल यह आवंटन रद्द करने की मांग की है. अलेमाओ ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पहले पणजी को पाप नगरी बना दिया है और अब शांत गांवों को भी तबाह करने की तैयारी में है. अलेमाओ ने सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर भी मोर्चा खोला है.
गोवा की जनता से की है सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील
अलेमाओ ने गोवा की जनता से सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील की है. अलेमाओ ने कहा कि जनता की जमीन कॉरपोरेट्स को बेचने की इस साजिश के खिलाफ लोगों को एकजुट होकर विरोध करना चाहिए. उन्होंने कैसीनो मालिकों को भी क्रोनी पूंजीपति बताया है. साथ ही यह भी कहा है कि यह यह जमीन आवंटन का फैसला गोवा सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. सावंत सरकार किसानों और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा कर रही है, या फिर वह सिर्फ बड़े पूंजीपतियों की सेवा में लगी है? इस मामले में अब तक मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की तरफ से कोई सफाई सामने नहीं आई है.
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