भारत
Goa News: गोवा में सरकारी भ्रष्टाचार की शिकायतों के लंबित होने का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है, जिन पर लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं होने से सुनवाई नहीं हो पा रही है. इसके चलते विपक्षी दल मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल उठा रहे हैं.
Goa News: गोवा में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार एक नई मुसीबत में घिर गई है. मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति घोषित कर रखी है. इसके बावजूद राज्य में सरकारी भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों पर सुनवाई और कार्रवाई नहीं हो पा रही है. दरअसल राज्य में छह महीने बाद भी नए लोकायुक्त की नियुक्ति सावंत सरकार नहीं कर सकी है. इसके चलते करीब 20 शिकायतें लंबित पड़ी हैं. इससे विपक्षी दलों को मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत को घेरने का एक और मौका मिल गया है. विपक्षी दल मुख्यमंत्री की साफ-सुथरे शासन की प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
दिसंबर, 2024 में खत्म हो गया था लोकायुक्त का कार्यकाल
पिछले लोकायुक्त जस्टिस (रिटायर्ड) अंबादास जोशी का कार्यकाल पिछले साल दिसंबर में ही पूरा हो गया था. इसके बाद नए लोकायुक्त की नियुक्ति तत्काल होना चाहिए थी, लेकिन अब तक यह पद खाली पड़ा हुआ है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सतर्कता निदेशालय ने फरवरी 2025 में मुख्य सचिव को पत्र लिखकर चयन प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत बताई थी, लेकिन तब से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
विपक्ष लगा रहा है नियुक्ति टालने का आरोप
विपक्ष के नेता यूरी आलेमाओ ने भाजपा सरकार पर जानबूझकर नियुक्ति टालने का आरोप लगाया है. आलेमाओ ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा,'भाजपा भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन जवाबदेही से बचती है. क्या यह देरी रणनीतिक है? लंबित मामले फाइलों में धूल खा रहे हैं?' आलेमाओ ने साथ ही यह भी कहा कि जस्टिस जोशी की नियुक्ति भी तब हुई थी, जब उनसे पहले के लोकायुक्त का कार्यकाल खत्म हुए छह महीने हो चुके थे यानी ये कोई नई बात नहीं, बल्कि सरकार की आदतन लापरवाही है.
सरकार ने नहीं दिया देरी पर स्पष्टीकरण
विपक्षी नेता होने के चलते आलेमाओ का हमला राजनीतिक हो सकता है, लेकिन फिलहाल राज्य में प्रभावी भ्रष्टाचाररोधी सिस्टम नहीं होने की बात पूरी तरह सही है. लोकायुक्त की नियुक्ति में देरी पर सरकार ने कोई स्पष्टीकरण भी नहीं दिया है. यह हालत तब है, जब लोकायुक्त एक्ट में समयबद्ध नियुक्ति की व्यवस्था है. ऐसे में यह प्रक्रिया बिना किसी खास कारण के रूकी हुई है. कानूनी विशेषज्ञों और पारदर्शिता से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि इतने लंबे समय तक लोकायुक्त पद खाली रहना सरकार की नीयत और क्षमता पर जनता का भरोसा कमजोर करता है. एक सीनियर एडवोकेट के मुताबिक,'जब कोई लोकायुक्त ही नहीं है, तो गंभीर शिकायतें भी ठंडे बस्ते में चली जाती हैं.' यह मुद्दा ऐसे समय उठा है जब राज्य में अवैध शराब, ड्रग्स व्यापार और खरीद में गड़बड़ियों को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं. आलोचकों का मानना है कि लोकायुक्त की नियुक्ति में देरी से यह धारणा और मजबूत होती है कि सरकार कुछ छिपा रही है.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से जुड़ें.